भोपाल | मध्य प्रदेश:

मध्य प्रदेश में रबी सीजन 2026-27 के दौरान खरीदे गए गेहूं और दलहन के सुरक्षित रखरखाव के लिए शासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कारपोरेशन (MPWLC) ने प्रदेश के कई जिलों में गोदामों (वेयरहाउस) की क्षमता का 120% तक उपयोग करने की अनुमति दे दी है।

इन जिलों में मिली राहत

05 मई 2026 को प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश के अनुसार, गुना, अशोकनगर, दतिया, रतलाम, आगर मालवा, मंदसौर, नीमच, उज्जैन, इंदौर, धार, अलीराजपुर, खरगोन, राजगढ़, दमोह, पन्ना, बालाघाट, डिंडोरी, कटनी, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और उमरिया जिलों के कलेक्टर्स को निर्देश जारी किए गए हैं।

क्यों लिया गया यह फैसला?

पत्र के अनुसार, इन जिलों में गेहूं और दलहन की बंपर आवक के कारण जगह की कमी (शॉर्टफॉल) की स्थिति बन रही थी। परिवहन खर्च को कम करने और भंडारण व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए यह अनुमति दी गई है। यह नियम शासकीय और BOT गोदामों के साथ-साथ निजी गोदामों पर भी लागू होगा (निजी गोदामों को MPWLC की पूर्वानुमति लेनी होगी)।

भोपाल संभाग में भी है क्षमता बढ़ाने की दरकार

वेयरहाउसिंग कारपोरेशन ने कई जिलों को तो राहत दे दी है, लेकिन भोपाल संभाग के जिलों में भी गोदामों की क्षमता को 120% तक बढ़ाने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। भोपाल और इसके आस-पास के क्षेत्रों में भी किसान बड़ी मात्रा में अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं और भंडारण केंद्रों पर जगह की भारी कमी देखी जा रही है।

अगर सरकार और प्रशासन भोपाल संभाग के लिए भी तुरंत यह आदेश जारी करते हैं, तो किसानों और वेयरहाउस संचालकों दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे न केवल परिवहन का खर्च बचेगा बल्कि खुले में रखे अनाज के खराब होने का खतरा भी टल जाएगा। शासन को जल्द ही भोपाल संभाग की स्थिति का भी संज्ञान लेना चाहिए।

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