लखनऊ, 10 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट (अमौसी एयरपोर्ट) अब ड्रग तस्करों के लिए एक नया ट्रांजिट पॉइंट बनता जा रहा है। कस्टम विभाग की एयर इंटेलिजेंस यूनिट ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 2 करोड़ रुपये की ‘हाइड्रोपोनिक वीड’ (उच्च गुणवत्ता वाला गांजा) पकड़ी है। ताजा मामला: बिस्कुट की आड़ में नशा सोमवार को बैंकॉक से लखनऊ आई ‘थाई एयर एशिया’ की फ्लाइट (FD-146) से उतरे एक यात्री की गतिविधियाँ संदिग्ध पाई गईं। जब कस्टम अधिकारियों ने उसके बैग की तलाशी ली, तो वे हैरान रह गए। यात्री के बैग में खाने-पीने का सामान था, लेकिन बिस्कुट (कुकीज) के 8 टिन के डिब्बों के अंदर बिस्कुट नहीं, बल्कि 5.88 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड छिपाई गई थी। इस ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 2.05 करोड़ रुपये आकी गई है। आरोपी यात्री को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है कि यह खेप किसे पहुंचाई जानी थी। आंकड़ों की जुबानी: पिछले 5 सालों में बढ़ा ड्रग्स का खतरा यह घटना कोई अकेली नहीं है। पिछले 5 वर्षों (2021-2026) के सरकारी और एनसीबी (NCB) के आँकड़ों पर नजर डालें, तो भारत में ड्रग्स की बरामदगी और तस्करी के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। 1. बरामदगी में भारी उछाल: सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, 2014 से 2024-25 के बीच ड्रग्स की बरामदगी में कई गुना वृद्धि हुई है। • मात्रा: 2004-2013 के दशक में जहाँ कुल 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई थी, वहीं 2014-2024 के बीच यह आँकड़ा बढ़कर 1 करोड़ किलोग्राम से अधिक हो गया है। • कीमत: पकड़ी गई ड्रग्स की कीमत में भी भारी इजाफा हुआ है। पिछले दशक की तुलना में अब पकड़ी जाने वाली ड्रग्स की वैल्यू लगभग 25 से 30 गुना ज्यादा है। 2. विशेष ड्रग्स में वृद्धि (प्रतिशत में): पिछले 5 सालों के दौरान कुछ खास नशीले पदार्थों की तस्करी में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है: • हेरोइन: इसकी बरामदगी में लगभग 300% की वृद्धि हुई है। • गांजा/कैनबिस: इसमें लगभग 190-200% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। • ओपियम (अफीम): इसके मामलों में 172% तक का इजाफा हुआ है। 3. नया ट्रेंड: ‘हाइड्रोपोनिक वीड’ और ‘बैंकॉक रूट’ पिछले 1-2 सालों में ‘हाइड्रोपोनिक वीड’ (मिट्टी के बिना पानी में उगाया गया उच्च नशा वाला गांजा) की तस्करी सबसे ज्यादा बढ़ी है। तस्कर अब परंपरागत रास्तों की जगह हवाई मार्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं और बैंकॉक (थाईलैंड) इसके लिए एक प्रमुख स्रोत बनकर उभरा है। लखनऊ एयरपोर्ट पर ही पिछले 6 महीनों में 75 किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थ पकड़े जा चुके हैं। निष्कर्ष: जहाँ एक तरफ तस्कर नए-नए तरीके (जैसे बिस्कुट के डिब्बे, कैविटी वाले बैग) अपना रहे हैं, वहीं भारतीय एजेंसियां (NCB, DRI और कस्टम) भी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए रिकॉर्ड तोड़ बरामदगी कर रही हैं। लखनऊ का यह मामला इसी सतर्कता का प्रमाण है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation लोकसभा स्पीकर के खिलाफ विपक्ष का ‘हल्ला बोल’ ! अमेरिका के सामने ईरान का बड़ा दांव! परमाणु बम बनाने के करीब पहुंचा यूरेनियम घटाने को तैयार, लेकिन रखी यह शर्त