नई दिल्ली/अयोध्या: AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार की “बुलडोज़र नीति” पर तीखा हमला बोला है। अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े एक हालिया मामले (धोखाधड़ी/चोरी) को लेकर ओवैसी ने प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। ओवैसी ने कहा कि अगर इस मामले में कोई मुस्लिम आरोपी होता, तो प्रशासन अब तक उसके घर को जमींदोज कर चुका होता।

कार्रवाई में धर्म देखने का आरोप

सोशल मीडिया और मीडिया चैनलों पर सामने आए अपने बयान में ओवैसी ने सीधे तौर पर कानून व्यवस्था और सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

अगर राम मंदिर से जुड़े इस मामले में किसी मुस्लिम का नाम सामने आता, तो अब तक बिना किसी देरी के बुल्डोजर एक्शन हो गया होता। लेकिन चूंकि आरोपी दूसरे समुदाय (हिंदू) से हैं, इसलिए प्रशासन कानून की दुहाई दे रहा है और उनके साथ नरमी बरती जा रही है।”

 ओवैसी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बुल्डोजर की कार्रवाई अपराधियों को देखकर नहीं, बल्कि उनका धर्म देखकर तय की जाती है।

 उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक समुदाय के आरोपियों के घर तुरंत गिरा दिए जाते हैं, तो दूसरे समुदाय के आरोपियों के मामलों में सामान्य कानूनी प्रक्रिया का इंतजार क्यों किया जाता है?

 AIMIM प्रमुख ने कहा कि इस तरह का चश्मा पहनकर की गई कार्रवाई देश के संविधान और कानून व्यवस्था को कमजोर करती है।

यह विवाद उस समय गहराया जब अयोध्या और राम मंदिर के नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी रसीदें काटने या मंदिर परिसर से जुड़ी चोरी के कुछ मामले सामने आए, जिनमें स्थानीय पुलिस जांच कर रही है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि सरकार इन मामलों में वैसी आक्रामकता नहीं दिखा रही है, जैसी वह अन्य मामलों में दिखाती है।

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