नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, इस जन-आंदोलन की धार को कमजोर करने के लिए सत्तापक्ष (BJP) एक बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। रणनीतिकारों का मानना है कि इस पूरे मुद्दे को अब ‘राहुल गांधी बनाम सोनम वांगचुक’ की लड़ाई में बदलने की कोशिश की जा सकती है, ताकि मूल मुद्दा यानी छात्रों का भविष्य पीछे छूट जाए।

क्या है BJP का वो ‘गेम प्लान’ जो आंदोलन को करेगा कमजोर?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, जब भी कोई आंदोलन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता है, तो उसकी साख पर हमला किया जाता है। बीजेपी इस आंदोलन को कमजोर करने के लिए निम्नलिखित रणनीति अपना सकती है:

 ‘राजनीति से प्रेरित’ साबित करना: राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का इस्तेमाल बीजेपी यह दिखाने के लिए कर सकती है कि यह छात्रों का नहीं, बल्कि कांग्रेस का प्रायोजित आंदोलन है।

 बयानों का सहारा: हाल ही में सोनम वांगचुक की टीम या करीबियों की तरफ से आए उन बयानों को हवा दी जा रही है जिसमें विपक्षी नेताओं को आंदोलन पर राजनीति न करने की सलाह दी गई थी। बीजेपी इसी को ढाल बनाकर राहुल गांधी को घेर सकती है, जिससे जनता के बीच यह संदेश जाए कि आंदोलनकारी खुद विपक्ष के साथ नहीं हैं।

 फूट डालो और राज करो: अगर यह आंदोलन पूरी तरह से ‘कांग्रेस बनाम बीजेपी’ की लड़ाई में बदल गया, तो आम जनता और छात्रों का ध्यान भटक जाएगा और आंदोलन अपने आप बिखर जाएगा।

इस ‘चक्रव्यूह’ को काटने के लिए क्या करेंगे अभिजीत दिपके?

इस बड़े राजनीतिक गेम की भनक CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संयोजक अभिजीत दिपके को भी लग चुकी है। इस संभावित खतरे से निपटने के लिए दिपके और उनकी टीम यह कदम उठा सकती है:

 पूरी तरह ‘नॉन-पॉलिटिकल’ बने रहना: अभिजीत दिपके लगातार यह साफ कर रहे हैं कि उनका मंच किसी भी राजनीतिक दल की बपौती नहीं है। वे राहुल गांधी या किसी भी नेता के समर्थन का स्वागत तो करेंगे, लेकिन आंदोलन की कमान सिर्फ छात्रों और सामाजिक चेहरों के हाथ में ही रखेंगे।

 फोकस सिर्फ NEET और पेपर लीक पर: बीजेपी के इस गेम को फेल करने के लिए CJP का पूरा ध्यान केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों को न्याय दिलाने पर रहेगा, ताकि सरकार इसे राजनीतिक रंग न दे सके।

 डिजिटल और कानूनी मोर्चे पर मुस्तैदी: एक्स (X) हैंडल ब्लॉक होने और सोशल मीडिया पर चल रहे प्रोपेगैंडा का जवाब देने के लिए अभिजीत दिपके की टीम कानूनी और जमीनी दोनों स्तरों पर आक्रामक रुख अपनाए रखेगी।

अब देखना यह होगा कि क्या बीजेपी इस आंदोलन को राजनीतिक रंग देने में कामयाब होती है, या फिर अभिजीत दिपके और छात्रों की सूझबूझ सरकार की इस रणनीति को नाकाम कर देती है।

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