नई दिल्ली: सोशल मीडिया की चकाचौंध के पीछे छिपा अवसाद का गहरा अंधकार एक बार फिर सबके सामने आया है। मशहूर यूट्यूबर अनुराग डोभाल, जिन्हें दुनिया ‘UK07 राइडर’ के नाम से जानती है, ने हाल ही में एक लाइव वीडियो के दौरान अपनी कार 170 किलोमीटर प्रति घंटे की खतरनाक रफ्तार से दौड़ाकर कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया। गनीमत रही कि इस भयानक दुर्घटना में उनकी जान बच गई, लेकिन इस घटना ने समाज और कानून के समक्ष कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। निर्दोष लोगों की जान से खिलवाड़ इस पूरी घटना का सबसे चिंताजनक पहलू वह स्थान और तरीका है, जिसे इस कदम के लिए चुना गया। 170 किलोमीटर प्रति घंटे की अनियंत्रित गति से एक व्यस्त राजमार्ग पर वाहन चलाना किसी बड़े जनसंहार को निमंत्रण देने के समान था। अवसाद एक अत्यंत पीड़ादायक मानसिक स्थिति है, जिसके प्रति समाज की पूर्ण सहानुभूति होनी चाहिए, परंतु अपने मानसिक कष्ट के कारण सड़क पर चल रहे दर्जनों निर्दोष नागरिकों के जीवन को दांव पर लगाना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। प्रशासन की दोहरी चुनौती: उपचार और कानूनी कार्रवाई इस प्रकरण में प्रशासन और पुलिस के समक्ष दोहरी जिम्मेदारी है। एक ओर, यूट्यूबर को तत्काल उत्कृष्ट मनोवैज्ञानिक परामर्श और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना मानवीय दृष्टिकोण से परम आवश्यक है। वहीं दूसरी ओर, कानून अपना कार्य करेगा। मोटर वाहन अधिनियम के तहत खतरनाक ड्राइविंग, यातायात नियमों के घोर उल्लंघन और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए उचित कानूनी कार्रवाई भी अनिवार्य है। मानसिक तनाव किसी को भी जनजीवन को संकट में डालने का कानूनी अधिकार नहीं देता। युवाओं के मानस पटल पर नकारात्मक प्रभाव इस घटना का सबसे गहरा और अदृश्य आघात उन लाखों युवा अनुयायियों (फॉलोअर्स) पर पड़ेगा, जो इन इंटरनेट हस्तियों को अपना आदर्श मानते हैं। लाइव प्रसारण पर इस प्रकार के आत्मघाती कदमों को प्रदर्शित करने से समाज में एक अत्यंत गलत संदेश प्रवाहित होता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे वीडियो उन लोगों के लिए ‘ट्रिगर’ का काम कर सकते हैं जो स्वयं मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। यह समस्याओं का डटकर सामना करने के बजाय, उनसे पलायन करने की प्रवृत्ति को अवांछित रूप से प्रचारित करता है। यह दुर्घटना इस बात का ज्वलंत प्रमाण है कि डिजिटल युग में ‘इन्फ्लुएंसर्स’ पर न केवल स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने की चुनौती है, बल्कि उन्हें अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का भी बोध होना चाहिए। समाज को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी की व्यक्तिगत पीड़ा, सार्वजनिक आपदा का रूप न ले ले। नोट: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव या अवसाद से गुजर रहा है, तो कृपया किसी विशेषज्ञ या राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर (जैसे: 14416 या 1800-599-0019) पर संपर्क कर तुरंत सहायता प्राप्त करें। जीवन अनमोल है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation संसद में होगा महासंग्राम: क्या 9 मार्च को ओम बिरला को छोड़नी होगी स्पीकर की कुर्सी? जानिए पूरा गणित ईरान-इज़राइल महायुद्ध के बीच क्या पीएम मोदी बनेंगे दुनिया के ‘शांति दूत’?