नई दिल्ली / वाशिंगटन:

दुनिया की नज़रें इस वक्त मध्य पूर्व (Middle East) पर टिकी हैं, जहाँ इजराइल और ईरान के बीच का तनाव अब एक विनाशकारी रूप ले चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस लड़ाई में अमेरिका पूरी तरह से इजराइल के साथ खड़ा है। लेकिन इस युद्ध की गूंज सिर्फ इन तीन देशों तक सीमित नहीं है; इसके कारण पूरी दुनिया एक भयंकर ‘तेल संकट’ (Oil Crisis) के मुहाने पर खड़ी हो गई है।

ट्रंप का कड़ा रुख: “ईरान को उबरने में सालों लगेंगे”

हाल ही में एक बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त लहजे का इस्तेमाल किया। उन्होंने साफ कहा कि इजराइल द्वारा किए गए हालिया हमलों से ईरान को इतना भारी नुकसान हुआ है कि उसे वापस खड़ा होने में कई साल लग जाएंगे।

ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपनी फोन वार्ता को ‘शानदार’ बताते हुए कहा कि दोनों देश ईरान के मुद्दे पर पूरी तरह से एक ही सोच (same wavelength) रखते हैं। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि उनके पास इतनी सैन्य ताकत है कि वे चाहें तो इस पूरे ऑपरेशन को अपने नियंत्रण में लेकर दो-तीन दिन के भीतर ईरान का खेल खत्म कर सकते हैं।

युद्ध का सबसे बड़ा खौफ: गहराता वैश्विक तेल संकट (Oil Crisis)

हालाँकि ट्रंप के बयानों में जीत का विश्वास है, लेकिन इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई पर पड़ने वाला असर:

• होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर खतरा: दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है, जो ईरान के बिल्कुल करीब है। युद्ध के कारण इस रास्ते से तेल के जहाजों (Tankers) का निकलना बेहद जोखिम भरा हो गया है।

आसमान छूती कीमतें: मिडल ईस्ट में जैसे ही तनाव बढ़ता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम (Crude Oil Prices) तुरंत बढ़ जाते हैं। निवेशकों में डर है कि अगर ईरान के तेल ठिकानों पर और हमले हुए, तो दुनिया भर में तेल की भारी किल्लत हो सकती है।

• महंगाई की मार: तेल महंगा होने का सीधा मतलब है कि ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा। इससे खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के हर सामान के दाम बढ़ जाएंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर एक नई आर्थिक मंदी (Economic slowdown) आ सकती है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात (Import) करता है। अगर खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई बाधित होती है और दाम बढ़ते हैं, तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लग सकती है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और देश की महंगाई दर (Inflation) पर पड़ेगा।

आगे क्या?

फिलहाल, शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। ट्रंप के बयान यह दर्शाते हैं कि अमेरिका और इजराइल कूटनीति (समझौते) के बजाय आक्रामक सैन्य कार्रवाई पर जोर दे रहे हैं। अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई में तेल की सप्लाई को हथियार बनाया, तो यह सिर्फ एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगा।

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