भोपाल। राजधानी भोपाल के पॉश इलाकों और मुख्य बाजारों में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़िया कलां और 10 नंबर मार्केट जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सालों से चल रहे होटल, रेस्टोरेंट जैसे Amado Café, Snowberry, TAN Coffee,Oliver Bistro & Bakehouse,Bhopal Bakehouse & Cafe,Echoes, Handcrafted Cafe & Roastery ,Chai Kaapi, The White Barn Cafe और बड़े शोरूम और कॉर्पोरेट ऑफिसों पर नगर निगम (BMC) का डंडा चल रहा है। अब तक 1,000 से ज्यादा प्रतिष्ठानों को नोटिस थमाए जा चुके हैं, जबकि डर के मारे 200 से अधिक व्यापारियों ने खुद ही अपने शटर गिरा दिए हैं। व्यापारियों में भारी आक्रोश है। उनका सीधा सवाल है—”जब हमने लाखों रुपये देकर जमीन का डायवर्शन (Diversion) कराया, हम सालों से कमर्शियल टैक्स भर रहे हैं, तो आज अचानक हमें अवैध बताकर दुकानें क्यों बंद कराई जा रही हैं?” आइए समझते हैं कि इस पूरे मामले के पीछे सुप्रीम कोर्ट का क्या आदेश है, अधिकारियों की क्या लापरवाही रही और अब इसका क्या समाधान है। क्यों हो रही है यह ताबड़तोड़ कार्रवाई? यह पूरी कार्रवाई भोपाल नगर निगम अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के बेहद सख्त निर्देशों के पालन में कर रहा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों की राजधानियों में रिहायशी (Residential) इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को तुरंत बंद करने का आदेश दिया है। 4 अगस्त की डेडलाइन का डर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सभी नगर निगमों से 4 अगस्त 2026 तक ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (Action Taken Report) मांगी है। यदि 4 अगस्त तक कार्रवाई नहीं होती है, तो अधिकारियों पर अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की गाज गिर सकती है। इसी कानूनी दबाव के कारण नगर निगम की टीमें दिन-रात सीलिंग की कार्रवाई में जुटी हैं। डायवर्शन और टैक्स के बाद भी कार्रवाई क्यों? (तकनीकी पेंच) व्यापारियों का यह कहना बिल्कुल सही है कि उनके पास जमीनों के वैध डायवर्शन दस्तावेज हैं। लेकिन कानूनन यहां एक बड़ा तकनीकी पेंच फंस गया है: 1. राजस्व बनाम मास्टर प्लान: जमीन का डायवर्शन ‘राजस्व विभाग’ (Revenue Department) केवल टैक्स वसूलने के लिए करता है। लेकिन कोई भी दुकान या ऑफिस खोलने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) और नगर निगम के ‘मास्टर प्लान’ (Master Plan) के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। 2. मास्टर प्लान का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मास्टर प्लान में जो इलाका केवल रहने (Residential) के लिए आरक्षित है, वहां डायवर्शन होने के बाद भी बड़ी कमर्शियल एक्टिविटी नहीं चलाई जा सकती। कोर्ट के मुताबिक, रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण स्थानीय नागरिकों को ट्रैफिक, पार्किंग और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation रायसेन: आवारा पशुओं को हटाने के लिए नगरपालिका ने तय की ड्यूटी; ये हैं जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारियों के नंबर, काम न होने पर नागरिक बनाएं वीडियो मध्य प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस की बड़ी क्रांति: अब 181 हेल्पलाइन पर कॉल कर WhatsApp पर पाएं आय और जाति प्रमाण पत्र