भोपाल । मध्य प्रदेश:

भोपाल में पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की बहू त्विषा शर्मा की मौत का मामला अब और उलझ गया है। पुलिस की केस डायरी और हाल ही में सामने आए सीसीटीवी (CCTV) फुटेज ने मौत वाली रात की 40 मिनट की टाइमलाइन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। गिरिबाला के बयानों और सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग में काफी अंतर है, जिससे यह केस एक नई मिस्ट्री बन गया है।

क्या हुआ था 12 मई की रात? (CCTV और बयानों के आधार पर)

सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की जांच के अनुसार, 12 मई की रात की घटना का क्रम कुछ इस तरह रहा:

 रात 10:13 बजे: त्विषा अपने बाएं हाथ में हेडफोन लेकर छत पर जाती हुई दिखाई दी।

 रात 10:45 बजे: त्विषा की मां ने गिरिबाला को फोन किया। उन्होंने बताया कि त्विषा फोन पर रो रही थी और अब फोन नहीं उठा रही है, कृपया जाकर देखें कि वह कहां है।

 रात 10:50 बजे: गिरिबाला के बयान के अनुसार, जब वह छत पर पहुंचीं तो उन्होंने त्विषा को फंदे पर लटका पाया।

 रात 10:53 बजे: ठीक 3 मिनट बाद त्विषा की मां का दोबारा फोन आया। गिरिबाला ने उन्हें बताया कि ‘वह नहीं रही’। सबसे बड़ी उलझन यहीं है, क्योंकि सीसीटीवी फुटेज के अनुसार इस समय गिरिबाला छत पर गई ही नहीं थीं।

 रात 10:57 बजे: फुटेज में गिरिबाला और समर्थ छत पर जाते हुए दिखाई देते हैं।

 रात 11:00 बजे (लगभग): समर्थ का रिश्तेदार स्वराज दौड़ते हुए छत पर जाता है और करीब 1.5 मिनट बाद नीचे आ जाता है। इसके बाद एक अन्य महिला भी छत पर जाती है (दावा किया गया है कि समर्थ के वकीलों ने ही त्विषा को फंदे से उतारा)।

 रात 11:07 बजे: त्विषा को नीचे लाया जाता है। सीढ़ियों पर ही उसे CPR दी जाती है।

 रात 11:10 बजे: जब हालत नहीं सुधरी तो उसे ग्राउंड फ्लोर पर लाकर एम्स (AIIMS) अस्पताल के लिए रवाना किया जाता है।

 रात 12:05 बजे: एम्स अस्पताल के सीसीटीवी में उनकी एंट्री दर्ज है।

मामले के सबसे बड़े अनसुलझे सवाल

इस पूरी टाइमलाइन ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है:

1 जब त्विषा को 11:07 बजे नीचे लाया गया, तो 10:53 बजे ही मौत के बारे में कैसे बता दिया गया?

2 फंदे से उतारने के 14 मिनट बाद CPR क्यों दी गई?

3 10:50 से 11:07 बजे के बीच छत पर असल में क्या-क्या हुआ और कौन-कौन वहां मौजूद था?

4 अस्पताल ले जाने में इतनी देरी क्यों हुई, जब एम्स घर से पास ही है?

हाई कोर्ट से गिरिबाला को मिली अग्रिम जमानत

इस बीच, हाई कोर्ट ने बुधवार को गिरिबाला को अग्रिम जमानत दे दी है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी दलीलें रखने के लिए 5 मिनट का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने मना कर दिया और आदेश पत्र में इसे दर्ज करने को कहा।

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कोर्ट को बताया कि भोपाल जिला अदालत ने 24 घंटे की अधूरी जांच के आधार पर ही अग्रिम जमानत दे दी थी। यहां तक कि गिरिबाला के बयान भी दर्ज नहीं हुए थे और व्हाट्सएप चैट में दिख रही प्रताड़ना को भी निचली अदालत ने नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि केस डायरी और डिजिटल सबूतों की अनदेखी क्यों की गई। फिलहाल, सीबीआई (CBI) ने समर्थ को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

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