वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भले ही ईरान के साथ युद्ध को “लगभग खत्म” बता रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। एक तरफ अमेरिका अपनी जीत का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट (Middle East) में अपने हमले कई गुना तेज कर दिए हैं। ट्रम्प का दावा: “हमने दुश्मन की ताकत खत्म कर दी” 9 मार्च को दिए अपने बयान में ट्रम्प ने कहा था: • अमेरिका और इजरायल ने अपने मिलिट्री टारगेट पूरे कर लिए हैं। • ईरान की नौसेना (Navy), एयरफोर्स और मिसाइल सिस्टम लगभग खत्म हो चुके हैं। • उन्होंने इस लड़ाई को एक छोटा ऑपरेशन बताया और जल्द ही युद्ध खत्म करने का इशारा किया। जमीनी हकीकत: ईरान का खतरनाक पलटवार डिफेंस एक्सपर्ट्स और ग्राउंड रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान हार मानने के बजाय और ज्यादा आक्रामक (aggressive) हो गया है: • ईरान ने अपने घातक ड्रोन और भारी मिसाइलों से हमले दोगुने कर दिए हैं। • अब निशाने पर सिर्फ अमेरिकी सेना नहीं है, बल्कि सऊदी अरब, यूएई (UAE) और बहरीन में मौजूद अमेरिकी बेस भी हैं। • दुबई के एयरपोर्ट और खाड़ी देशों की तेल रिफाइनरियों (oil refineries) पर बड़े हमले हुए हैं, जो यह साफ दिखाते हैं कि ईरान इस युद्ध को लंबा खींचना चाहता है। क्या यह सिर्फ एक दिखावा है? एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ट्रम्प का यह बयान अपने देश की जनता को शांत रखने का एक राजनीतिक “दिखावा” हो सकता है। हकीकत में दोनों तरफ भारी नुकसान हुआ है: • इस युद्ध में अमेरिका ने अब तक अपने 8 सैनिक और 3 फाइटर जेट खोए हैं, साथ ही उनके सहयोगी देशों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। • वहीं, ईरान ने अपने पूर्व सुप्रीम लीडर और 3000 से ज्यादा सैनिकों की जान गंवाई है। निष्कर्ष: यह युद्ध अभी खत्म होता नहीं दिख रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर के आने के बाद यह लड़ाई एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध (regional war) का रूप ले चुकी है। अमेरिका के लिए यह वैसी आसान जीत नहीं है, जैसी वे बताने की कोशिश कर रहे हैं। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation क्या कुर्सी से हटाए जाएंगे मुख्य चुनाव आयुक्त? विपक्ष उठाने जा रहा है ये बड़ा कदम मंच पर ‘लाड़ली’, फाइलों में बेगानी: 100% काम करने वाली सरकारी ‘बहनों’ का दर्द, “भैया, हमारी मेहनत का पैसा रोकने कोर्ट क्यों जा रहे हो?”