पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम, फिर भी रेट वही? जानिए कैसे पीएम मोदी ने गुपचुप तरीके से बचा लिया आपके घर का बजट! नई दिल्ली । आजकल दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं। पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण हालात ऐसे हैं कि अगर सरकार ध्यान न देती, तो अब तक पेट्रोल और डीजल के दाम 20 से 30 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके होते। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को अपनी जनता का पूरा ख्याल है। आम आदमी की जेब पर इसका बोझ न पड़े, इसके लिए मोदी सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने उठाया अपना नुकसान, जनता को दी राहत आम आदमी को महंगाई के झटके से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले अपने टैक्स (Excise Duty) में सीधे 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद डीजल पर यह टैक्स पूरी तरह 0 हो गया है, जबकि पेट्रोल पर अब यह सिर्फ 3 रुपये प्रति लीटर रह गया है। सरकार ने अपनी कमाई छोड़ दी ताकि तेल कंपनियों का घाटा कम हो सके और उन्हें जनता के लिए तेल के दाम न बढ़ाने पड़ें। कई लोगों के मन में यह सवाल है कि इस फैसले से पेट्रोल पंप पर तेल सस्ता क्यों नहीं हुआ? दरअसल, यह फैसला रेट कम करने के लिए नहीं, बल्कि रेट को अचानक बढ़ने से रोकने के लिए लिया गया है। अगर सरकार यह टैक्स कम नहीं करती, तो: • पेट्रोल और डीजल रातों-रात 20 से 30 रुपये महंगे हो जाते। • माल ढुलाई (Transport) का खर्च अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता। • इसके कारण दूध, सब्जी, फल, राशन और जरूरत की हर चीज तुरंत महंगी हो जाती। • गरीब और मिडिल क्लास परिवार का महीने का बजट पूरी तरह बिगड़ जाता। आम नागरिक सबसे ऊपर मुश्किल ग्लोबल हालात के बीच मोदी सरकार का यह कदम साफ दिखाता है कि उनके लिए देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिक की शांति सबसे ऊपर है। सरकार ने एक तरह से देश के सामने आने वाले महंगाई के एक बहुत बड़े तूफान को बिना शोर-शराबे के रोक दिया है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation पेट्रोल-डीजल की ‘नकली’ किल्लत: मुनाफे के लालच में दलाल कर रहे जमाखोरी, पंपों से खाली हाथ लौट रही जनता अमेरिका को ईरान का ‘जैसे को तैसा’ जवाब: शांति वार्ता फेल, खाड़ी देशों में फिर शुरू हुए हमले, क्या दुनिया में मचेगी तबाही?