भोपाल ।मध्य प्रदेश:

मध्य प्रदेश में फसल उपार्जन केंद्रों पर इन दिनों किसानों को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खरीदी केंद्रों पर 5-6 दिन इंतजार करने के बाद भी किसानों का नंबर नहीं आ रहा है, जिसके कारण उनके स्लॉट की तारीख निकल रही है। किसानों की इस बड़ी समस्या को लेकर समाजसेवी शुभम पटेल ने प्रदेश के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री, एमडी नागरिक आपूर्ति निगम और एनआईसी (NIC) को पत्र लिखकर उपार्जन पोर्टल पर ‘स्लॉट डिलीट’ (Slot Delete) का विकल्प जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की है।

बिना मर्जी के चुन लिए गए केंद्

किसानों की मुख्य समस्या यह है कि कई जगह कंप्यूटर ऑपरेटरों ने अपने निजी फायदे के लिए किसानों की मर्जी के बिना ही खरीदी केंद्र चुन लिए हैं। नतीजा यह है कि इन गिने-चुने केंद्रों पर इतनी ज्यादा भीड़ हो गई है कि किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर 5-6 दिनों से वहीं खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। पोर्टल पर पहले से बुक किए गए स्लॉट को हटाने (Delete) का कोई विकल्प नहीं दिया गया है, जिससे किसान चाहकर भी भीड़भाड़ वाले केंद्र को छोड़कर दूसरा खाली केंद्र नहीं चुन पा रहे हैं।

मजबूरी का फायदा उठा रहे ऑपरेटर और हम्माल

सिस्टम की इस कमी और लंबी लाइन का सीधा फायदा कुछ ऑपरेटर और हम्माल मिलकर उठा रहे हैं। कई केंद्रों से ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि ये लोग मिलकर किसानों से रिश्वत मांग रहे हैं और पैसे लेकर बिना लाइन के माल जल्दी तौलने का ऑफर दे रहे हैं। जो किसान पैसे नहीं दे रहे, उन्हें कई दिनों तक इंतजार करवाया जा रहा है। इससे किसानों पर बेवजह का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

सरकार से तत्काल समाधान की मांग

इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए समाजसेवी शुभम पटेल ने शासन प्रशासन को पत्र भेजा है। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि अगर पोर्टल पर तुरंत ‘स्लॉट डिलीट’ का ऑप्शन नहीं जोड़ा गया, तो किसानों का यह शोषण ऐसे ही चलता रहेगा और कई किसान अपनी फसल बेचने से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि तकनीकी खामी को तुरंत दूर कर किसानों को अपनी मर्जी से केंद्र बदलने की सुविधा दी जाए, ताकि उन्हें भ्रष्टाचार से बचाया जा सके।

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