“जब हवा ही जहर बन जाए, तो इंसान सांस कहां ले?”

ईरान की राजधानी तेहरान आज एक गहरे काले धुएं की चादर में लिपटी हुई है। तेल के गोदामों पर हुए हमलों के बाद वहां का आसमान ऐसा हो गया है मानो दिन में ही रात हो गई हो। यह सिर्फ एक खबर नहीं है, यह उन लाखों लोगों का दर्द है जो इस वक्त ताजी हवा की एक-एक सांस के लिए तड़प रहे हैं।

जमीनी हकीकत: एक खौफनाक मंजर

• काली बारिश का खौफ: आसमान से अब साफ पानी की बूंदें नहीं, बल्कि जहरीली ‘काली बारिश’ हो रही है। यह तेजाब जैसी बारिश लोगों की त्वचा (skin) को नुकसान पहुंचा रही है।

• घरों में कैद मासूम: बच्चे, बूढ़े और बीमार लोग अपने ही घरों में छिपने को मजबूर हैं। पिछले 48 घंटों से हालात इतने खराब हैं कि बाहर निकलना जानलेवा साबित हो सकता है।

• खतरे में जिंदगियां: अस्पतालों में उन आम लोगों की भीड़ है जिनकी आंखों में तेज जलन है और जिनके फेफड़े इस खतरनाक धुएं से भर गए हैं।

इंसानियत के लिए एक सवाल

जब भी कोई हमला या टकराव होता है, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान हमेशा बेकसूर आम इंसान को ही उठाना पड़ता है। सरहदें चाहे जो भी हों, एक मां का अपने बीमार बच्चे के लिए दर्द पूरी दुनिया में एक जैसा ही होता है। तेहरान के आसमान में छाए ये काले बादल आज हम सब से एक ही सवाल पूछ रहे हैं— क्या हमारी इंसानियत भी इस धुएं में कहीं छिप गई है?

आज जरूरत इस बात की है कि दुनिया भर के लोग राजनीति और नफरत से ऊपर उठकर इस इंसानी दर्द को महसूस करें और शांति की दुआ करें।

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