नई दिल्ली: त्योहारी सीज़न में जहां आम निवेशक बाज़ार से मुनाफे और दिवाली बोनस की उम्मीद लगाए बैठे थे, वहीं घरेलू शेयर बाज़ार में आए ज़बरदस्त भूचाल ने करोड़ों निवेशकों को करारा झटका दिया है। एक ही कारोबारी सत्र में चारों तरफ मची भारी बिकवाली के चलते बीएसई (BSE) पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब ₹10 लाख करोड़ घट गया। बाज़ार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि सेंसेक्स और निफ्टी भरभरा कर नीचे आ गिरे, जिससे खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो पूरी तरह लाल निशान में तब्दील हो गए।

गिरावट के पीछे के 5 बड़े कारण

 कच्चे तेल में भारी उबाल: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है। भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर देश में महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने की चिंता अचानक गहरी हो गई।  

 विदेशी निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाज़ार से लगातार अपनी पूंजी निकाल रहे हैं। सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड और अन्य बाज़ारों की तरफ पैसे के रुख ने घरेलू इक्विटी पर भारी दबाव बनाया।  

 ब्याज दरों में सख्ती का डर: केंद्रीय बैंकों और मौद्रिक नीतियों को लेकर सख्त रुख की आहट से बाज़ार में लिक्विडिटी घटने की आशंका बढ़ गई है। दरों में कटौती में देरी के संकेतों ने निवेशकों का हौसला तोड़ दिया।  

 चौतरफा बिकवाली की मार: केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की। मेटल, रियल्टी और एनर्जी जैसे प्रमुख सेक्टर सबसे ज़्यादा टूटे।

 कमज़ोर वैश्विक रुख: एशियाई और अमेरिकी बाज़ारों से मिले नकारात्मक संकेतों के चलते घरेलू दलाल स्ट्रीट पर पहले घंटे से ही दबाव हावी रहा।

आर्थिक ग्रोथ के दावों के बीच आम निवेशक का दर्द

एक ओर देश की 7% से 8% की जीडीपी विकास दर के दावे चर्चा में हैं, वहीं ज़मीनी स्तर पर खुदरा निवेशकों के लिए यह दिन भारी नुकसान का सबब बन गया। बाज़ार के जानकारों का मानना है कि देश की बुनियादी अर्थव्यवस्था भले ही मज़बूत हो, लेकिन शेयर बाज़ार वैश्विक अनिश्चितताओं और लिक्विडिटी के झटकों पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है।

त्योहारों से ठीक पहले आई इस बड़ी गिरावट ने बाज़ार के सेंटिमेंट को हिला कर रख दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कच्चे तेल और विदेशी बिकवाली का दबाव थमता नहीं, तब तक बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को ऐसे माहौल में हड़बड़ी में फैसले लेने से बचने और गुणवत्तापूर्ण शेयरों पर ही भरोसा रखने की सलाह दी जा रही है।

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