जबलपुर/भोपाल मध्य प्रदेश में नवनियुक्त शिक्षकों (New Teachers) के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (जबलपुर) ने राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए उस विवादास्पद नियम पर कड़ी टिप्पणी की है, जिसके तहत नियुक्ति के शुरुआती तीन वर्षों (प्रोबेशन पीरियड) में कर्मचारियों को पूरा वेतन न देकर केवल स्टाइपेंड दिया जा रहा था। कोर्ट के हालिया रुख ने हजारों शिक्षकों के लिए “समान काम, समान वेतन” की उम्मीद जगा दी है। क्या है ’70-80-90%’ का नियम? साल 2019 में, मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने एक राजपत्र अधिसूचना जारी की थी। इस नियम के अनुसार, राज्य में सीधी भर्ती से नियुक्त होने वाले तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों (जिनमें शिक्षक भी शामिल हैं) को तीन साल के प्रोबेशन (परिवीक्षा अवधि) पर रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें पूरा वेतन न देकर स्टाइपेंड दिया जाएगा: • प्रथम वर्ष: मूल वेतन का 70% • द्वितीय वर्ष: मूल वेतन का 80% • तृतीय वर्ष: मूल वेतन का 90% • चतुर्थ वर्ष: परिवीक्षा समाप्त होने पर 100% पूर्ण वेतन। हाई कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला? इस नियम से प्रभावित सैकड़ों शिक्षकों ने जबलपुर हाई कोर्ट और इंदौर बेंच में याचिकाएं दायर की थीं। शिक्षकों का तर्क था कि जब उनकी नियुक्ति पूर्णकालिक (Full Time) है और वे एक नियमित शिक्षक के बराबर ही कार्य कर रहे हैं, तो वेतन में कटौती क्यों? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि यह नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत का उल्लंघन है। इसके अलावा, लोक सेवा आयोग (PSC) से चयनित अधिकारियों को पहले दिन से पूरा वेतन मिलता है, जबकि कर्मचारी चयन मंडल (ESB) से चयनित शिक्षकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और निर्देश हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष को सही मानते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं: 1. वेतन कटौती अनुचित: कोर्ट ने माना कि किसी भी कर्मचारी को उसके पद के निर्धारित “न्यूनतम वेतनमान” (Minimum of the Pay Scale) से कम वेतन नहीं दिया जा सकता। 2. नियुक्ति दिनांक से लाभ: कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को उनकी नियुक्ति दिनांक से ही 100% वेतन का लाभ दिया जाए। 3. एरियर का भुगतान: कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले वर्षों में जो राशि (30%, 20%, 10%) काटी गई थी, उसका गणना पत्रक (Calculation Sheet) बनाकर एरियर (Arrears) के रूप में भुगतान किया जाए। आगे क्या होगा? कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यद्यपि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला दिया है, लेकिन सरकार ने अभी तक इसे “सभी कर्मचारियों” (General Order) के लिए लागू नहीं किया है। वर्तमान में लाभ उन्हीं को मिल रहा है जो कोर्ट की शरण ले रहे हैं। हालांकि, इस फैसले ने भविष्य में सभी नवनियुक्त कर्मचारियों के लिए पूर्ण वेतन का आधार तैयार कर दिया है। निष्कर्ष: यह फैसला न केवल आर्थिक रूप से शिक्षकों के लिए बड़ी जीत है, बल्कि यह उनकी सेवा शर्तों और वरिष्ठता (Seniority) को भी सुरक्षित करता है। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस आदेश को कब तक और कैसे लागू करता है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation मणिपुर के उखरूल में फिर भड़की हिंसा: 25 से ज्यादा घर जलकर खाक, इंटरनेट सेवा 5 दिनों के लिए बंद , कैसे बनेगी शांति व्यवस्था? लोकसभा में राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला, बोले- ‘अमेरिका के आगे किया सरेंडर’; स्पीकर ओम बिरला ने छोड़ी कुर्सी