​भोपाल:

राजधानी के रिहायशी इलाकों (Residential Areas) में अवैध रूप से चल रहे कैफे, रेस्टोरेंट, शोरूम और दफ्तरों के संचालकों को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने सीलिंग की कार्रवाई पर किसी भी तरह की अंतरिम रोक (Stay) लगाने से साफ मना कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि सीलिंग के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए। इस रुख के बाद अब नगर निगम (BMC) और जिला प्रशासन की टीमें बाकी बचे अवैध प्रतिष्ठानों पर ताला जड़ने के लिए दोबारा मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।

​सील तोड़े जाने पर जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह बात भी आई कि नगर निगम की पिछली कार्रवाई के बाद कई जगह सील तोड़कर या पिछले दरवाजों से प्रतिष्ठान दोबारा शुरू कर दिए गए थे। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया और प्रशासन से सीलिंग का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा। कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई में कोई रुकावट नहीं डाली जाएगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरा पालन होगा।

​मास्टर प्लान पर भी सुप्रीम कोर्ट का सख्त पहरा

पिछले 21 सालों से अटके भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर भी अदालत ने बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को मास्टर प्लान का ड्राफ्ट पब्लिश करने और जनता से दावे-आपत्तियां मांगने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन यह साफ कर दिया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट पूरे प्लान की समीक्षा कर मंजूरी नहीं देगा, तब तक इसे अंतिम रूप से लागू नहीं किया जा सकेगा।

​62,000 से ज्यादा संपत्तियां रडार पर

नगर निगम के सर्वे के मुताबिक, शहर के आवासीय इलाकों में करीब 62,500 संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इनमें से 8,000 से ज्यादा संपत्तियों को नोटिस थमाए जा चुके हैं। अब कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद अरेरा कॉलोनी, एमपी नगर, चूना भट्टी, शाहपुरा, रोहित नगर और गुलमोहर जैसे पॉश इलाकों में चलने वाले अवैध कैफे, लाउंज और दफ्तरों पर बड़े पैमाने पर सीलिंग की गाज गिरना तय माना जा रहा है।

​कारोबारियों में हड़कंप, रहवासियों ने ली राहत की सांस

सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख से जहां एक तरफ व्यापारियों और कैफे संचालकों की धड़कनें बढ़ गई हैं, वहीं दूसरी तरफ आवासीय कॉलोनियों के आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है। रहवासियों का कहना है कि शांत रिहायशी गलियों में देर रात तक चलने वाले कैफे, अवैध पार्किंग और हुड़दंग से उन्हें अब स्थायी तौर पर मुक्ति मिल सकेगी।

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