राजगढ़/मध्यप्रदेश:  मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के छोटे से गांव फुंदिया के युवाओं ने साबित कर दिखाया है कि अगर नीयत साफ हो और इरादे मजबूत, तो व्यवस्थाओं का रोना रोए बिना भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। बच्चों को महंगे प्राइवेट स्कूलों में भेजने के बजाय यहां के 40 युवाओं ने मिलकर अपने ही गांव के सरकारी स्कूल का कायाकल्प कर दिया।

जनभागीदारी से जुटाए 2 लाख रुपये

आशीष नागर और ओमप्रकाश यादव की अगुवाई में गांव के युवाओं ने मिलकर करीब 2 लाख रुपये का फंड जुटाया। इस राशि से कक्षा 1 से 8वीं तक के कमरों में रेड कार्पेट बिछवाए गए, स्कूल की सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग कराई गई और पूरे परिसर में CCTV कैमरे लगाए गए।

स्कूल में किए गए मुख्य सुधार:

  • अंग्रेजी के लिए अलग शिक्षक: स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं था, तो युवाओं ने 6,000 रुपये महीने के मानदेय पर अपने खर्चे से एक शिक्षक नियुक्त किया।
  • पर्यावरण और पानी की सुविधा: परिसर में 200 पौधे लगाए गए और पीने के पानी के लिए मोटर पंप की व्यवस्था की गई।
  • स्मार्ट सुविधाएं: क्लासरूम को आधुनिक शिक्षण सामग्री और जरूरी सुविधाओं से लैस किया गया।

मेहनत रंग लाई: 15 बच्चों ने पास की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति परीक्षा

इस सकारात्मक माहौल का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर दिखा। आज स्कूल में 108 बच्चे आधुनिक माहौल में शिक्षा ले रहे हैं। हाल ही में इस स्कूल के 15 बच्चों ने ‘राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति’ (NMMS) परीक्षा पास कर गांव का नाम रोशन किया है, जिससे उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए सरकारी आर्थिक सहायता मिलेगी।

फुंदिया गांव के युवाओं का यह संदेश पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है— “सरकारी स्कूल हमारे हैं, तो इन्हें संवारने की जिम्मेदारी भी हमारी है।”

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