इंफाल:मणिपुर में 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस भारी सुरक्षा पहरे और तनावपूर्ण शांति के बीच मनाया गया। राज्य में लंबे समय से जारी जातीय तनाव के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। राजधानी इंफाल से लेकर विभिन्न जिला मुख्यालयों तक मुख्य आधिकारिक कार्यक्रम बिना किसी बड़ी हिंसक घटना के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गए।

राजधानी में मुख्य समारोह और सुरक्षा व्यवस्था

इंफाल स्थित 1st मणिपुर राइफल्स ग्राउंड में राज्यस्तरीय मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन किया गया, जहाँ मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। समारोह को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा बलों ने घाटी और पहाड़ी इलाकों के बफर जोन में विशेष निगरानी रखी। संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए लगातार निगरानी की गई ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

बहिष्कार और बंद का मिला-जुला असर

पूर्वोत्तर के कुछ उग्रवादी गुटों और स्थानीय संगठनों द्वारा स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार और आम हड़ताल (जनता कर्फ्यू) का आह्वान किया गया था। इस आह्वान का असर राज्य के कई हिस्सों में साफ नजर आया:

 सड़कों पर सन्नाटा: इंफाल घाटी समेत कई पहाड़ी जिलों में मुख्य बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान और दुकानें पूरी तरह बंद रहीं।

 यातायात ठप: निजी वाहन और सार्वजनिक परिवहन सड़कों से नदारद रहे, जिससे आम जनजीवन की रफ्तार थमी रही।

 सरकारी दफ्तरों में उपस्थिति: कड़े सुरक्षा घेरे के बीच केवल आधिकारिक और आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोग ही सड़कों पर दिखे।

राहत शिविरों में बच्चों ने फहराया तिरंगा

हिंसा के कारण विस्थापित हुए हजारों लोग जो पिछले लंबे समय से राहत शिविरों में रह रहे हैं, वहाँ भी स्वतंत्रता दिवस का सादा आयोजन देखा गया। कई राहत शिविरों और स्थानीय स्कूलों में बच्चों ने तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान गाया। विस्थापित परिवारों ने इस मौके पर जल्द से जल्द शांति बहाली और अपने घरों को लौटने की उम्मीद जताई।

प्रशासन की प्राथमिकता: स्थायी शांति और पुनर्वास

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रशासन की ओर से यह दोहराया गया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य में स्थायी शांति स्थापित करना और विस्थापित लोगों का सुरक्षित पुनर्वास है। सुरक्षा बलों की सक्रियता और सतर्कता की वजह से पूरा दिन शांतिपूर्ण रहा और किसी भी बड़ी झड़प या अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली।

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