MP Congress में ‘महाभारत’ क्या कांग्रेस के नेता ख़ुद डूबा देंगे पार्टी?

भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राज्यसभा चुनाव के बाद से पार्टी के भीतर सुलग रही अंतर्कलह अब पूरी तरह से सड़कों और बंद कमरों से निकलकर मीडिया के सामने आ चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गुटों के बीच बढ़ता फासला अब पार्टी के लिए बड़ी बदनामी की वजह बनता जा रहा है। लगातार आ रहे विरोधाभासी बयानों के कारण कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही है, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच भारी निराशा है।

सवाल यह उठ रहा है कि यदि मुख्य विपक्षी दल चुनाव से पहले ही इतना कमजोर और बिखरा हुआ नजर आएगा, तो वह सत्तापक्ष को चुनौती कैसे देगा?

कैमरे के सामने आई तल्खी, दिग्गजों के अलग-अलग सुर

हाल ही में हुई बैठकों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, उसने कांग्रेस के ‘ऑल इज वेल’ के दावों की पोल खोलकर रख दी है। जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह के बीच की खींचतान अब किसी से छुपी नहीं है। दिग्विजय सिंह के भाई और वरिष्ठ नेता लक्ष्मण सिंह ने भी हाल ही में यह कहकर आग में घी डालने का काम किया कि “कैमरा झूठ नहीं बोलता”। नेताओं की इस आपसी लड़ाई ने कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह तोड़ दिया है।

क्या जीतू पटवारी की होगी छुट्टी? हाईकमान के सामने ‘एक तरफ कुआं, एक तरफ खाई’

पार्टी के भीतर बढ़ते इस घमासान के बाद अब सबकी नजरें दिल्ली दरबार (कांग्रेस हाईकमान) पर टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि क्या जीतू पटवारी की छुट्टी होगी? हालांकि, हाईकमान के लिए यह फैसला इतना आसान नहीं है:

 राहुल गांधी का भरोसा: जीतू पटवारी को राहुल गांधी की पसंद माना जाता है। उन्हें एमपी में नई पीढ़ी का नेतृत्व खड़ा करने के लिए कमान सौंपी गई थी। ऐसे में उन्हें हटाना हाईकमान के अपने फैसले पर सवाल खड़े करेगा।

 गुटबाजी बढ़ने का खतरा: यदि पटवारी को हटाया जाता है, तो कमलनाथ गुट, दिग्विजय गुट और अरुण यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं के बीच नए सिरे से वर्चस्व की जंग शुरू हो सकती है।

बीच का रास्ता निकाल सकता है दिल्ली दरबार

सूत्रों की मानें तो हाईकमान पूरी तरह चेहरा बदलने के बजाय ‘डैमेज कंट्रोल’ के मूड में है। इसके लिए कुछ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं:

1 नेताओं को सख्त चेतावनी: दोनों गुटों के बड़े नेताओं को दिल्ली तलब कर मीडिया में बयानबाजी पर पूरी तरह रोक लगाने को कहा जा सकता है।

2 कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति: जीतू पटवारी की कमान बरकरार रखते हुए, सत्ता संतुलन के लिए कुछ सीनियर या ओबीसी चेहरों (जैसे अरुण यादव या अजय सिंह) को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर जिम्मेदारी बांटी जा सकती है।

लोकतंत्र के लिए कमजोर विपक्ष बड़ा खतरा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी मजबूत लोकतंत्र के लिए एक सशक्त विपक्ष का होना बेहद जरूरी है। मध्य प्रदेश में यदि कांग्रेस समय रहते अपनी इस आपसी कलह को नहीं सुलझा पाती है, तो आगामी चुनावों में उसे इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जनता के मुद्दों को उठाने के बजाय पार्टी का अपनी ही अंदरूनी लड़ाई में उलझे रहना, भाजपा को वॉकओवर देने जैसा साबित हो रहा है।

error: Content is protected !!