करीब 200 हमलावरों ने वन विभाग की टीम पर गोफन (गुलेल) और धारदार हथियारों से किया हमला।

 हमले में 10 से ज्यादा वनकर्मी गंभीर रूप से घायल, वनरक्षक का कान काटा, गाड़ियों को रोकने के लिए बिछाई थीं लोहे की कीलें।

 जंगल के रास्तों पर बारूदी सुरंगों (माइंस) की तरह नुकीली कीलें गाड़कर वन विभाग की गाड़ियों को किया गया पंचर ।

खंडवा /मध्य प्रदेश :मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां के वन विभाग की गुड़ी रेंज में आने वाले आमखजुरी इलाके में अतिक्रमण हटाने और अपनी जमीन की रक्षा करने गई वन विभाग की टीम पर करीब 200 अतिक्रमणकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस खूनी संघर्ष में हमलावरों ने वनकर्मियों को चारों तरफ से घेरकर गोफन (गुलेल जैसी चीज), पत्थरों और धारदार हथियारों से हमला किया। इस बर्बर हमले में 10 से अधिक वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनमें से कुछ की हालत काफी नाजुक है।

2 घंटे तक चला खूनी तांडव, वर्दी भी फाड़ी

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना रविवार सुबह करीब 11 बजे की है। आमखजुरी के जंगलों में बड़े पैमाने पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जमीन जोत रहे अतिक्रमणकारियों को रोका, तो वे भड़क गए। हमलावरों ने महिलाओं की आड़ लेकर अचानक वन अमले पर पथराव और हमला शुरू कर दिया।

यह संघर्ष करीब 2 घंटे तक चलता रहा। हमलावरों ने वनरक्षक शैलेंद्र यादव पर धारदार हथियार से हमला कर उनका कान काट दिया। वहीं, एक अन्य वनकर्मी ज्वाला सिंह के सिर और गर्दन पर पत्थरों से जोरदार वार किया गया। हमलावरों ने वनकर्मियों की वर्दी तक फाड़ दी और लाठियों से बेरहमी से पीटा। अपनी जान बचाने के लिए कई वनकर्मियों को खेतों में लेटना पड़ा।

इन वनकर्मियों पर हुआ हमला

इस हिंसक हमले में मुख्य रूप से वनरक्षक ओमप्रकाश पिंडारे, राजेंद्र सक्तावत, चंद्रपाल तोमर, राजेश बागड़ी, शैलेंद्र यादव, सोहन कवचे, प्रदीप और रोमांक समेत 10 से अधिक कर्मचारी बुरी तरह चोटिल हुए हैं।

गाड़ियों को रोकने के लिए बिछाईं ‘लोहे की कीलें’

अतिक्रमणकारियों की साजिश इतनी खतरनाक थी कि उन्होंने वन विभाग के गश्ती वाहनों को रोकने के लिए पूरे रास्ते में बारूदी सुरंगों (माइंस) की तरह बड़ी-बड़ी नुकीली कीलें गाड़ रखी थीं।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले 15 दिनों से उनके वाहनों के टायर लगातार पंक्चर हो रहे थे। जब जांच की गई तो पता चला कि हर 150 से 200 मीटर की दूरी पर लकड़ी के गुटकों और पाइपों में नुकीली कीलें लगाकर उन्हें जमीन के अंदर नट-बोल्ट से कस दिया गया था। इसके अलावा जंगल में मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण वाहन खराब होने पर वनकर्मी बैकअप टीम या मदद भी नहीं बुला पाते थे। वन अधिकारियों का मानना है कि यह किसी सामान्य ग्रामीण का काम नहीं, बल्कि एक सोची-समझी और सुनियोजित गिरोह की रणनीति है।

100 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जे का खेल, किसका संरक्षण?

खंडवा जिले में लगभग 16 हजार हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण की बात सामने आ रही है, जिसमें से अकेले कुमठा-हीरापुर और आमखजुरी इलाके में ही 1000 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। मौजूदा विवाद आमखजुरी की लगभग 100 हेक्टेयर जमीन को लेकर है, जहां बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इन अतिक्रमणकारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है, जो वे प्रशासनिक टीम पर भी हमला करने से नहीं कतरा रहे हैं।

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