भोपाल | मध्य प्रदेश:

मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज (20 मई 2026) हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की नई तबादला नीति (MP Transfer Policy 2026) को मंजूरी दे दी गई है। राज्य में लंबे समय से तबादलों पर लगा बैन अब हटने जा रहा है। सरकार ने ट्रांसफर के लिए 15 दिन की एक खास विंडो तय की है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस नई ट्रांसफर पॉलिसी के नियम क्या हैं और इससे कर्मचारियों को क्या फायदा होगा:

सिर्फ 15 दिन के लिए खुला है बैन

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, प्रदेश में तबादलों पर लगा प्रतिबंध 1 जून 2026 से 15 जून 2026 तक के लिए हटाया जाएगा। यानी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए सिर्फ 15 दिन का समय रहेगा। सरकार चाहती है कि यह प्रक्रिया जल्दी पूरी हो जाए ताकि मानसून से जुड़े कामों में कोई रुकावट न आए।

ट्रांसफर में किसे मिलेगी प्राथमिकता? (पति-पत्नी की पोस्टिंग पर जोर)

नई तबादला नीति में एक बहुत ही अच्छा और मानवीय फैसला लिया गया है। अगर पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं (उदाहरण के लिए अगर पत्नी किसी स्कूल में उच्च माध्यमिक शिक्षक है और पति भी सरकारी नौकरी में है), तो उन्हें एक ही जगह पर पोस्टिंग देने को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे उन परिवारों को बहुत राहत मिलेगी जो अलग-अलग शहरों में नौकरी करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को भी ट्रांसफर में खास छूट मिलेगी।

किसके पास होंगे ट्रांसफर के अधिकार?

इस बार की पॉलिसी में प्रभारी मंत्रियों को काफी अधिकार दिए गए हैं:

• क्लास 1 अधिकारी: प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के तबादले सीधे मुख्यमंत्री की मंजूरी से ही होंगे।

• क्लास 3 और 4 कर्मचारी: जिले के अंदर (Within District) तबादले प्रभारी मंत्री की सहमति के बाद कलेक्टर करेंगे।

• अगर एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर कराना है, तो इसके लिए संबंधित विभाग के मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री दोनों की मंजूरी लेना जरूरी होगा।

स्कूल शिक्षा विभाग के लिए अलग से आएगी पॉलिसी

ध्यान देने वाली बात यह है कि स्कूल शिक्षा विभाग (शिक्षकों) के तबादले इस सामान्य पॉलिसी के तहत नहीं होंगे। शिक्षा विभाग के लिए सरकार हमेशा की तरह अपनी अलग ट्रांसफर गाइडलाइन और ऑनलाइन प्रक्रिया जारी करेगी।

थोकबंद सिफारिशों पर लगेगी लगाम

नई पॉलिसी में यह कोशिश की गई है कि विधायकों और नेताओं की थोकबंद सिफारिशों के बजाय, सिर्फ असल जरूरत और प्रशासनिक काम के आधार पर ही ट्रांसफर किए जाएं।

मोहन सरकार का यह कदम कर्मचारियों के लिए एक बड़ा तोहफा है। ‘पति-पत्नी को एक स्थान’ पर पोस्टिंग देने का नियम कई परिवारों को एक साथ लाने का काम करेगा। अब देखना यह है कि 1 जून से शुरू हो रही इस प्रक्रिया में कितने कर्मचारियों को अपनी मनचाही जगह मिल पाती है।

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