जापान सरकार ने ‘बिजनेस मैनेजर वीजा’ के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। इन नए नियमों के कारण 30 साल से जापान में रह रहे और रेस्टोरेंट चला रहे भारतीय नागरिक मनीष कुमार को देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।

टोक्यो: जापान में पिछले 30 सालों से रह रहे एक भारतीय रेस्टोरेंट मालिक मनीष कुमार इन दिनों एक बड़े संकट का सामना कर रहे हैं। जापान के इमिग्रेशन विभाग ने उनका ‘बिजनेस मैनेजर वीजा’ रिन्यू करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें अपना रेस्टोरेंट बंद करके वापस भारत लौटने का आदेश दिया गया है। इस फैसले से मनीष कुमार और उनका परिवार गहरे सदमे में है।

मनीष कुमार पिछले 18 सालों से जापान के साइतामा (Saitama) इलाके में एक इंडियन करी रेस्टोरेंट चला रहे हैं। वे जापान में 30 साल से रह रहे हैं और उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी वहीं गुजार दी है। लेकिन साल 2025 के आखिर में जापान सरकार ने विदेशी कारोबारियों के लिए ‘बिजनेस मैनेजर वीजा’ के नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए, जिसका सीधा असर मनीष जैसे छोटे कारोबारियों पर पड़ा है।

क्यों रिजेक्ट हुआ वीजा? (क्या हैं नए नियम)

जापान सरकार ने वीजा नियमों को अब काफी सख्त कर दिया है:

• निवेश की रकम बढ़ाई: पहले इस वीजा को पाने के लिए 5 मिलियन येन (लगभग 26 लाख रुपये) का निवेश दिखाना होता था। अब इस रकम को 6 गुना बढ़ाकर 30 मिलियन येन (लगभग 1.6 करोड़ रुपये) कर दिया गया है।

• कड़ी शर्तें: नई रकम के अलावा, अब बिजनेस में कम से कम 1 जापानी नागरिक को नौकरी पर रखना और खुद जापानी भाषा का ज्ञान होना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

चूंकि मनीष कुमार ने इतने सालों में कभी जापान की नागरिकता या ‘परमानेंट रेजिडेंसी’ (PR) के लिए आवेदन नहीं किया था, इसलिए उन्हें हर बार अपना वीजा रिन्यू कराना पड़ता था। नए नियमों के तहत इतनी बड़ी रकम और शर्तें पूरी न कर पाने के कारण उनका वीजा रिन्यू नहीं हो सका।

विरोध प्रदर्शन में रो पड़े मनीष कुमार

13 मई 2026 को टोक्यो में हुए एक विरोध प्रदर्शन में मनीष कुमार अपना दर्द बताते हुए फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैंने जिंदगी भर मेहनत करके यहां अपना घर बनाया है। मेरे बच्चे यहीं पैदा हुए हैं, वे सिर्फ जापानी भाषा बोलते हैं और उनके सारे दोस्त भी यहीं हैं। मैंने कोई अपराध नहीं किया है, फिर मुझे मेरे ही घर से क्यों निकाला जा रहा है?”

सरकार का क्या तर्क है?

जापान के अधिकारियों का कहना है कि कई लोग सिर्फ देश में बसने के लिए फर्जी कंपनियां बनाकर इस बिजनेस वीजा का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। इसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए नियम कड़े किए गए हैं। लेकिन इन नियमों की वजह से मनीष कुमार जैसे ईमानदार और दशकों पुराने कारोबारी भी इस सिस्टम की चपेट में आ गए हैं।

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