भोपाल । मध्य प्रदेश:

मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश की नई स्थानांतरण नीति 2026 के ड्राफ्ट में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। राजकाज न्यूज़ की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कि प्रशासनिक पारदर्शिता और कसावट लाने के लिए इस नई नीति में कौन से 5 प्रमुख बदलाव प्रस्तावित हैं:  

नई नीति के 5 बड़े बदलाव:

• स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादले अलग: नए नियम के तहत अब स्वैच्छिक (Voluntary) और आपसी (Mutual) तबादलों को प्रशासनिक तबादलों के कोटे से पूरी तरह अलग रखा जाएगा। पहले ये दोनों एक ही कोटे में 50-50 के अनुपात में शामिल होते थे। अलग होने से सरकार अब प्रशासनिक कसावट के लिए पिछले साल के मुकाबले 5% ज्यादा प्रशासनिक तबादले कर सकेगी।  

• स्वैच्छिक आवेदनों को मिलेगी पहली प्राथमिकता: कर्मचारियों की सुविधा के लिए स्वैच्छिक आवेदनों का निराकरण गुण-दोष के आधार पर सबसे पहले किया जाएगा। इससे कर्मचारियों की कार्य करने की क्षमता बढ़ेगी और सरकार को इन तबादलों में कोई प्रशासनिक खर्च भी नहीं देना पड़ेगा।  

• नेताओं की ‘थोकबंद’ सिफारिशों पर लगेगी रोक: नए नियमों के तहत मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की तरफ से आने वाली थोकबंद सिफारिशों पर अब ब्रेक लगाया जाएगा। अगर कोई नेता बड़ी संख्या में सिफारिशें भेजता है, तो भ्रष्टाचार और पक्षपात को रोकने के लिए उनकी गहन पड़ताल की जाएगी।  

• प्रक्रिया 100% ऑनलाइन और नया ‘फीडबैक सिस्टम’: ट्रांसफर के लिए ऑफलाइन आवेदनों को पूरी तरह बंद करके प्रक्रिया को 100% ऑनलाइन किया जा रहा है। पारदर्शिता जांचने के लिए एक ‘फीडबैक सिस्टम’ भी जुड़ेगा, जिसके तहत कर्मचारियों से यह जानकारी ली जाएगी कि उन्हें इस प्रक्रिया में कोई परेशानी या भ्रष्टाचार का सामना तो नहीं करना पड़ा।  

• स्कूल शिक्षा विभाग की नीति अलग होगी: शिक्षकों के बड़े कैडर को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग को सामान्य नीति से अलग रखा गया है और उनकी स्वतंत्र पॉलिसी आएगी। जिन शिक्षकों या कर्मचारियों की ड्यूटी मार्च 2027 तक जनगणना में लगी है, उनके स्थानांतरण पर पूरी तरह रोक रहेगी।  

• तबादलों की समय-सीमा: तबादलों पर से 15 मई से 15 जून तक (एक महीने के लिए) प्रतिबंध हटाया जा सकता है।  

• 3 विकल्प: कर्मचारियों से उनकी मनचाही पोस्टिंग के लिए 3 विकल्प मांगे जाएंगे।  

• अधिकार: जिले के भीतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के ट्रांसफर प्रभारी मंत्रियों और कलेक्टरों के पास रहेंगे। वहीं प्रथम श्रेणी के अफसरों के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य होगी।  

• बार-बार ट्रांसफर पर रोक: जिन कर्मचारियों का पिछले 1 वर्ष के भीतर ट्रांसफर हुआ है, सामान्य परिस्थितियों में उनका दोबारा तबादला नहीं किया जाएगा।

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