अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक नए और उलझे हुए मोड़ पर आ गया है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प युद्ध खत्म होने का दावा कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ईरान पर संभावित हमले की तैयारी कर रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस वैश्विक तनाव के बीच, दोनों देशों के शीर्ष नेताओं को अपने ही घर में भारी राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ट्रम्प का दावा और सेना की तैयारी में विरोधाभास अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐलान किया है कि ईरान के खिलाफ युद्ध को रोक दिया गया है। उनके रक्षा मंत्री के अनुसार, 7 अप्रैल से लागू सीजफायर सफल रहा है, इसलिए युद्ध को आगे बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है। इसी वजह से 1 मई को संसद में युद्ध की मंजूरी का प्रस्ताव पेश नहीं किया गया। हालांकि, इसके बिल्कुल विपरीत, अमेरिकी सेंटकॉम के कमांडर ने ईरान पर ‘सडन स्ट्राइक’ (अचानक हमले) को लेकर ट्रम्प को ब्रीफिंग दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी बॉम्बर विमान और जंगी जहाज हमले की पोजीशन में तैनात हैं। ईरान की कड़ी चेतावनी: “उंगली मिसाइल के बटन पर है” अमेरिका की इन तैयारियों पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर उस पर हमले की कोई भी कोशिश हुई, तो अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार ने चेतावनी देते हुए कहा है कि उनकी उंगलियां मिसाइल के बटन पर हैं और इशारा मिलते ही वे हमला कर देंगे। दोनों देशों में अपनों से ही घिरे नेता यह युद्ध अब दोनों देशों के लिए अंदरूनी राजनीति का अखाड़ा बन गया है: • अमेरिका का हाल: राष्ट्रपति ट्रम्प को अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के 53 में से 12 सांसदों का विरोध झेलना पड़ रहा है। वहीं, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सभी 47 सांसद पहले से ही युद्ध के खिलाफ हैं। • ईरान का हाल: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची की कुर्सी भी खतरे में है। सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान कुछ अहम मुद्दों पर उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति और स्पीकर को अंधेरे में रखा। इसके बाद अब शीर्ष नेता उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। युद्ध से अमेरिका को हुआ भारी नुकसान इस तनाव ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है: • अमेरिका अब तक इस युद्ध पर 2.38 लाख करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। • अमेरिका में ‘कॉस्ट ऑफ लिविंग’ में 12% की बढ़ोतरी हुई है। पिछले 2 महीने में ईंधन के दाम 5% से ज्यादा बढ़ गए हैं। • इस महंगाई के कारण हर औसत अमेरिकी नागरिक पर हर महीने 250 डॉलर (लगभग 23 हजार रुपये) का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। • इसके अलावा, ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित 16 अमेरिकी सैन्य बेस पर हमले किए थे। इन हमलों में अमेरिका को अपने 5 फाइटर जेट गंवाने पड़े और 14 अमेरिकी सैनिक मारे गए। होर्मुज जलडमरूमध्य और शांति का नया प्रस्ताव युद्ध का एक बड़ा असर व्यापार पर भी पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहां पहले रोजाना 125 तेल टैंकर गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 6 रह गई है। इस बीच, ईरान ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ के जरिए शांति वार्ता का एक नया प्रस्ताव भेजा है। ईरान की शर्त है कि बातचीत की टेबल पर आने से पहले होर्मुज को लेकर उसकी शर्तें मानी जाएं। हालांकि, ईरान के इस नए प्रस्ताव में परमाणु मुद्दे का कोई जिक्र नहीं है, जबकि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation क्या सच में खत्म हो गई ईरान की सेना ? इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल, अमेरिका ने की समुद्री नाकेबंदी अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप ने ठुकराया शांति प्रस्ताव, फिर से दी सैन्य हमले की चेतावनी