अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर बात नहीं बन पाई। इस्लामाबाद |पाकिस्तान: दुनिया भर की निगाहें पाकिस्तान के इस्लामाबाद पर टिकी थीं, जहां अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच एक अहम शांति वार्ता चल रही थी। लेकिन 21 घंटे की लंबी और मैराथन बैठक के बाद यह वार्ता बिना किसी नतीजे के फेल हो गई है। दोनों ही देश अपनी-अपनी मुख्य शर्तों पर अड़े रहे और एक-दूसरे की बात मानने से साफ इनकार कर दिया। इस शांति वार्ता के फेल होने से मिडिल ईस्ट (Middle East) और पूरी दुनिया में टेंशन और बढ़ने की आशंका है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह बातचीत किन मुद्दों पर आकर टूट गई। बातचीत फेल होने के 2 मुख्य कारण 1. परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) पर अमेरिकी शर्त: इस बातचीत में अमेरिका की ओर से सबसे बड़ी शर्त यह रखी गई थी कि ईरान लिखित में यह वादा करे कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और ना ही इसकी तकनीक विकसित करेगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने इसे सबसे अहम मुद्दा बताया था, लेकिन ईरान ने अमेरिका की इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया। 2. हर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का कंट्रोल: व्यापार के नजरिए से दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक ‘हर्मुज जलडमरूमध्य’ पर ईरान अपना पूरा कंट्रोल चाहता है। दुनिया का बहुत सारा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अमेरिका किसी भी हाल में इस समुद्री रास्ते पर ईरान का कंट्रोल नहीं चाहता। ईरान की वो 10 मांगें, जिन्हें अमेरिका ने ठुकराया शांति बनाए रखने के लिए ईरान ने भी 10 पॉइंट्स का एक प्रस्ताव (Proposal) अमेरिका के सामने रखा था। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा थीं और वे हमारा भरोसा जीतने में नाकाम रहे। ईरान की मुख्य मांगें कुछ इस प्रकार थीं: • आर्थिक प्रतिबंध हटें: अमेरिका तुरंत प्रभाव से ईरान पर लगे सभी तरह के आर्थिक प्रतिबंध (Sanctions) हटा ले। • फ्रीज किया पैसा वापस मिले: अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के बैंकों में ईरान के जो पैसे फ्रीज किए गए हैं, उन्हें तुरंत वापस किया जाए। • परमाणु ऊर्जा का अधिकार: ईरान को शांतिपूर्ण कामों (जैसे बिजली बनाने) के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग करने की पूरी आजादी मिले। • लेबनान पर हमले रुकें: इजरायल द्वारा लेबनान पर किए जा रहे हमलों को तुरंत रोका जाए। अमेरिका का कहना है कि उसने शांति के लिए अपना सबसे ‘बेस्ट और फाइनल ऑफर’ ईरान को दे दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया है। 21 घंटे की इस फेल वार्ता के बाद अब साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी है। अब देखना यह है कि दुनिया के बाकी बड़े देश इस बढ़ते तनाव को कम करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation सीजफायर या धोखा? ईरान से समझौते के बीच इजरायल ने लेबनान पर क्यों किया महाहमला? क्या सच में खत्म हो गई ईरान की सेना ? इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल, अमेरिका ने की समुद्री नाकेबंदी