हमारे देश में बच्चों को सुधारने और उन्हें सही रास्ता दिखाने के लिए किशोर न्याय कानून (Juvenile Justice Law) को काफी नरम बनाया गया है। लेकिन अब यही नरमी समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। कुछ शातिर आपराधिक गिरोह (Syndicate) मासूम बच्चों की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं। ये गिरोह 14 से 17 साल के नाबालिग बच्चों को पैसों और आईफोन जैसे महंगे गैजेट्स का लालच देकर उनसे हत्या, रेप और पोर्नोग्राफी जैसे खौफनाक काम करवा रहे हैं। कानून की नरमी का उठा रहे हैं फायदा अपराधी यह अच्छी तरह जानते हैं कि अगर कोई नाबालिग पकड़ा जाता है, तो कानून उसके प्रति नरम रहेगा। उसे बाल सुधार गृह (Juvenile Home) भेजा जाएगा और वह कुछ ही समय में बाहर आ जाएगा। इसी बात का फायदा उठाकर बड़े-बड़े गैंग खुद को बचाने के लिए बच्चों को अपनी ढाल बना रहे हैं। हाल ही के कुछ मामले जो हैरान करते हैं: • दिल्ली बवाना मर्डर केस: हाल ही में दिल्ली के बवाना इलाके में एक विरोधी की हत्या करने के लिए कुख्यात गैंग ने शूटर्स भेजे थे। जब पुलिस ने इन्हें पकड़ा, तो पता चला कि मर्डर करने वालों में एक नाबालिग भी शामिल था। बड़े गैंग अब जानबूझकर नाबालिगों को मर्डर के लिए काम पर रख रहे हैं। • नागपुर का सिंडिकेट: इसी साल मार्च में नागपुर पुलिस ने एक बड़े गिरोह को पकड़ा। इस गिरोह के 18 बड़े अपराधी, 14 मासूम बच्चों से वाहन चोरी, दंगे और यौन उत्पीड़न जैसे अपराध करवा रहे थे। पुलिस ने इन पर नए कानून (BNS) के तहत केस दर्ज किया है, जिसमें बच्चों से अपराध करवाने वालों पर सख्त सजा का नियम है। • ब्लैकमेलिंग और पोर्नोग्राफी: कई साइबर क्रिमिनल ऑनलाइन गेमिंग के जरिए बच्चों को फंसा रहे हैं। वे गेमिंग हैक्स या आईफोन का लालच देकर बच्चों से उनके आपत्तिजनक वीडियो मंगवाते हैं। बाद में उन्हीं वीडियो के जरिए बच्चों को ब्लैकमेल किया जाता है और डराकर उनसे ड्रग्स सप्लाई या दूसरे गैरकानूनी काम करवाए जाते हैं। NCRB (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) के आंकड़े बताते हैं कि देश में नाबालिगों द्वारा किए जाने वाले अपराधों की संख्या साल भर में 40,000 के पार जा चुकी है। प्रशासन इन गिरोहों से कैसे लड़ेगा? इस नए खतरे से निपटने के लिए प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा: 1. मास्टरमाइंड पर सबसे सख्त कार्रवाई: जो लोग बच्चों को उकसा कर हथियार थमा रहे हैं, पुलिस को उन पर गैंगस्टर एक्ट जैसे कड़े कानून लगाने होंगे। बच्चों के पीछे छिपे असली मुजरिमों को बिना जमानत वाली धाराओं में जेल भेजना होगा। 2. साइबर सेल की एक्टिव मॉनिटरिंग: इंटरनेट और गेमिंग ऐप्स पर बच्चों को लालच देने वालों को पकड़ने के लिए साइबर पुलिस को ज्यादा अलर्ट रहना होगा। डिजिटल दुनिया में इन गिरोहों की ट्रैकिंग बहुत जरूरी है। 3. कानून की नई धाराओं का इस्तेमाल: नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) में बच्चों से अपराध करवाने वालों के खिलाफ सख्त नियम हैं। पुलिस को इन धाराओं का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना होगा। 4. जागरूकता अभियान: प्रशासन को स्कूलों और माता-पिता के साथ मिलकर बच्चों की काउंसलिंग करनी होगी। बच्चों को समझाना होगा कि एक आईफोन या कुछ पैसों का लालच उनकी पूरी जिंदगी और उनका भविष्य कैसे बर्बाद कर सकता है। यह वक्त की मांग है कि पुलिस और प्रशासन इस नए खतरे को हल्के में न लें। अगर समय रहते इन अपराधियों के नेटवर्क को नहीं तोड़ा गया, तो यह देश के भविष्य यानी हमारे बच्चों के लिए बहुत खतरनाक साबित होगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation अमेरिका से 10 कदम आगे निकले ईरान के हैकर्स! FBI डायरेक्टर का ही कर दिया अकाउंट हैक Fact Check: 7,000 रुपये का एक Gucci डायपर? जानिए सोशल मीडिया पर वायरल इस दावे की पूरी सच्चाई