क्या गाय पर होने वाली सियासत अब खत्म? गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ बनाने की मांग लेकर मुस्लिम समुदाय भी उतरा सड़क पर।

भोपाल । रायसेन ।

हाल ही में देश की राजनीति में एक ऐसा बदलाव देखने को मिला है जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की थी। जिन मुस्लिम संगठनों पर हमेशा से गोकशी का आरोप लगता रहा है, वही अब सड़कों पर उतरकर गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ (National Animal) घोषित करने की मांग कर रहे हैं। इस कदम ने दशकों पुरानी उस राजनीति की नींव हिला दी है जो ‘गाय’ के नाम पर वोट बटोरने का काम करती थी।

आइए इस पूरे मुद्दे का गहराई से विश्लेषण करते हैं कि आखिर इससे किसे फायदा होगा, किसे नुकसान और किसकी राजनीति हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।

1. किसको फायदा होगा?

• देश की आम जनता और आपसी भाईचारा: सबसे बड़ा फायदा देश के सामाजिक ताने-बाने को होगा। गाय के नाम पर होने वाले हिंदू-मुस्लिम विवाद कम होंगे और समाज में शांति व भाईचारा बढ़ेगा।

• विकास की राजनीति करने वाले नेता: जब धर्म और गाय जैसे भावनात्मक मुद्दे चुनाव से गायब हो जाएंगे, तो चुनाव का मुख्य मुद्दा शिक्षा, रोजगार, अस्पताल और विकास बन जाएगा। जो नेता सच में काम करना चाहते हैं, उन्हें इसका सीधा फायदा मिलेगा।

• कानून व्यवस्था (Law and Order): पुलिस और प्रशासन का बहुत सारा समय और ऊर्जा धार्मिक विवादों को सुलझाने में जाती है। इस मुद्दे के शांत होने से प्रशासन अपराध रोकने पर ज्यादा ध्यान दे पाएगा।

2. किसको नुकसान होगा?

• कट्टरपंथी संगठन (दोनों तरफ के): वे लोग या संगठन जो समाज में डर और नफरत फैलाकर अपना प्रभाव बनाए रखते हैं, उनके लिए यह सबसे बड़ा नुकसान है। जब विवाद ही नहीं रहेगा, तो ऐसे संगठनों की समाज में कोई अहमियत नहीं रह जाएगी।

• धर्म की आड़ में राजनीति करने वाले नेता: जो राजनेता विकास कार्यों के बजाय केवल मंच से भड़काऊ भाषण देकर चुनाव जीतते आए हैं, उनके सामने अब वोट मांगने का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

3. किसकी राजनीति होगी खत्म?

• वोट बैंक की राजनीति (Vote Bank Politics): राजनीतिक पार्टियां जो एक समुदाय को दूसरे का डर दिखाकर वोट लेती थीं, उनका यह सबसे बड़ा हथियार छिन जाएगा। ‘हमें वोट दो नहीं तो वो आ जाएंगे’ वाली राजनीति का अंत तय है।

• तथाकथित ‘गौ-रक्षकों’ की आड़ में छिपे अपराधियों की: गो-रक्षा के नाम पर कानून हाथ में लेने वाले और समाज में गुंडागर्दी करने वालों की राजनीति पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

4. सत्ताधारी नेताओं और सरकार के सामने क्या है चुनौती?

अब तक सरकारें यह कहकर बच जाती थीं कि यह एक ‘संवेदनशील’ मुद्दा है। लेकिन अब जब दोनों समुदाय (हिंदू और मुस्लिम) एक ही मांग कर रहे हैं, तो गेंद सीधा सरकार के पाले में आ गई है। अब राजनेताओं के पास कोई बहाना नहीं बचा है। उन्हें या तो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिए संविधान में बड़े बदलाव करने होंगे, या फिर जनता को ठोस कारण बताना होगा कि वे ऐसा क्यों नहीं कर पा रहे हैं।

मुस्लिम संगठनों की इस पहल ने भारतीय राजनीति के एक बहुत बड़े ‘इमोशनल कार्ड’ को बेअसर कर दिया है। यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अच्छा संकेत है कि अब राजनीतिक पार्टियों को जनता के बीच असली और जमीनी मुद्दों (जैसे- सड़क, पानी, रोजगार) पर बात करनी पड़ेगी।

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