भारी जनविरोध और दबाव के बाद, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने विधायकों, मंत्रियों और विधानसभा स्पीकर के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी करने वाले 4 बिलों को वापस लेने का फैसला किया है। इन बिलों के जरिए विधायकों की सैलरी में सीधे 3 गुना तक का इजाफा किया जाना था। क्या था पूरा मामला? • 3 गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव: पिछले साल दिसंबर 2025 के शीतकालीन सत्र में उड़ीसा विधानसभा ने 4 संशोधन बिल पास किए थे। इन बिलों में विधायकों की महीने की सैलरी 1.11 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 3.45 लाख रुपये करने का प्रस्ताव था। • पेंशन और भत्तों में भी था इजाफा: इसके अलावा मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर और नेता प्रतिपक्ष के वेतन, भत्ते और पेंशन में भी भारी बढ़ोतरी की जानी थी। • राज्यपाल के पास थे पेंडिंग: ये चारों बिल विधानसभा से पास होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे गए थे और अब तक पेंडिंग थे। सरकार को क्यों लेना पड़ा फैसला वापस? जैसे ही सैलरी बढ़ाने वाले इन बिलों की खबर आम हुई, राज्य भर में इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया। आम जनता, सामाजिक संगठनों (Civil Society) और विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम की भारी आलोचना की। लोगों का कहना था कि टैक्स के पैसे का इस्तेमाल इस तरह नेताओं की सैलरी 3 गुना बढ़ाने में नहीं होना चाहिए। इस चौतरफा विरोध को देखते हुए सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। वापसी की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू: उड़ीसा सरकार के संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग ने विधानसभा सचिव को इन 4 बिलों को वापस (Withdraw) लेने के लिए आधिकारिक नोटिस सौंप दिया है। कौन से 4 बिल हो रहे हैं वापस? 1. विधायकों के वेतन, भत्ते और पेंशन (संशोधन) बिल, 2025 2. स्पीकर के वेतन और भत्ते (संशोधन) बिल, 2025 3. डिप्टी स्पीकर के वेतन और भत्ते (संशोधन) बिल, 2025 4. मंत्रियों के वेतन और भत्ते (संशोधन) बिल, 2025 Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation महिला आरक्षण पर फिर छिड़ी रार: जयराम रमेश ने पीएम मोदी को कहा ‘यू-टर्न उस्ताद’, सरकार से की यह बड़ी मांग अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता, क्या सरकार को टेकने पड़ेंगे घुटने?