कोलकाता |

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई नई वोटर लिस्ट से करीब 13 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इस बड़े बदलाव के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे एक बड़ी साजिश करार दिया है।

क्यों काटे गए 13 लाख नाम?

चुनाव आयोग लगातार वोटर लिस्ट को साफ और सही बनाने का काम कर रहा है। 23 और 24 मार्च 2026 को जारी हुई नई लिस्ट में उन 32 लाख मामलों का निपटारा किया गया, जिनकी जांच चल रही थी। इनमें से लगभग 40 प्रतिशत, यानी 13 लाख वोटरों के नाम काट दिए गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई फर्जी वोटरों को हटाने, मृत लोगों के नाम काटने और एक से ज्यादा जगह दर्ज नामों को हटाने के लिए की गई है।

टीएमसी और ममता बनर्जी का कड़ा विरोध

सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस छंटनी का कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप है कि जानबूझकर खास समुदायों और गरीब लोगों को वोट देने से रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि शादी के बाद अपना सरनेम (उपनाम) बदलने वाली महिलाओं के नाम भी बिना वजह काटे गए हैं, जो लोगों के अधिकारों का सीधा हनन है।

बीजेपी ने आरोपों को बताया गलत

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने टीएमसी के इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बहुत ही पारदर्शी तरीके से हो रही है। उनका आरोप है कि टीएमसी अपने राजनीतिक नुकसान के डर से बेवजह हंगामा कर रही है।

जिनके नाम कटे हैं, वे क्या करें?

इस बीच, 24 मार्च की रात चुनाव आयोग की वेबसाइट पर आई एक तकनीकी खराबी ने भी लोगों की धड़कनें बढ़ा दी थीं, हालांकि उसे बाद में सुधार लिया गया।

जिन मतदाताओं के नाम लिस्ट से कट गए हैं, उन्हें अभी भी एक मौका दिया जा रहा है। वे राज्य के अलग-अलग जिलों में बनाए गए 19 न्यायाधिकरणों (Tribunals) में जाकर अपनी अपील दर्ज करा सकते हैं।

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