कोलकाता :

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य में मुख्य मुकाबला भले ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच माना जा रहा हो, लेकिन एक नए राजनीतिक समीकरण ने ममता बनर्जी की नींद उड़ा दी है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और बंगाल के स्थानीय नेता हुमायूं कबीर की नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) ने हाथ मिला लिया है। इस नए गठबंधन ने बंगाल की राजनीति में खलबली मचा दी है।

149 सीटों पर ठोका दावा, निशाने पर अल्पसंख्यक वोट

ओवैसी और हुमायूं कबीर के इस गठबंधन ने ऐलान किया है कि वे राज्य की 294 में से 149 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे। गठबंधन का पूरा फोकस मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तरी दिनाजपुर और दक्षिण 24 परगना जैसे उन इलाकों पर है, जहां अल्पसंख्यक (minority) वोटर्स की संख्या बहुत ज्यादा है। हुमायूं कबीर के साथ आने से ओवैसी को बंगाल में एक मजबूत स्थानीय चेहरा मिल गया है, जिससे उनकी पकड़ जमीनी स्तर पर और मजबूत होने की उम्मीद है।

TMC को सता रहा है वोट कटने का डर

पिछले कई चुनावों से बंगाल का अल्पसंख्यक वोट बैंक पूरी तरह से ममता बनर्जी की पार्टी TMC के पाले में रहा है। यही वोट बैंक TMC की जीत का सबसे बड़ा कारण भी बनता रहा है। लेकिन अब ओवैसी और कबीर का गठबंधन इसी वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर यह गठबंधन अल्पसंख्यक वोटों का एक छोटा हिस्सा भी अपने पक्ष में करने में कामयाब रहा, तो इसका सबसे बड़ा और सीधा नुकसान TMC को ही उठाना पड़ेगा।

BJP को मिलेगा इस बंटवारे का फायदा?

चुनावी गणित को समझें तो, जब एक ही समुदाय के वोट TMC और नए गठबंधन के बीच बंट जाएंगे, तो इसका सीधा फायदा BJP को मिल सकता है। वोटों के इस बंटवारे (vote split) के कारण कई सीटों पर BJP के उम्मीदवार कम वोट पाकर भी जीत दर्ज कर सकते हैं। यही कारण है कि TMC लगातार ओवैसी की पार्टी को “BJP की बी-टीम” कहकर उन पर निशाना साध रही है।

गठबंधन का TMC पर बड़ा आरोप

दूसरी तरफ, ओवैसी और हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी की सरकार पर तीखा हमला बोला है। गठबंधन के नेताओं का साफ कहना है कि TMC ने अल्पसंख्यक समाज को सिर्फ अपने वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार ने इस समाज को शिक्षा, रोजगार और असली विकास से दूर रखा है। इसी वजह से अब उन्होंने अपने हकों की लड़ाई खुद लड़ने का फैसला किया है।

बंगाल की राजनीति में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। ओवैसी और कबीर का यह गठबंधन चुनाव में कितनी सीटें जीत पाएगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इन्होंने TMC के लिए एक बड़ी चुनौती जरूर खड़ी कर दी है। अब देखना यह होगा कि ममता बनर्जी इस चुनौती से कैसे निपटती हैं।

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