ईरान युद्ध के कारण कच्चा तेल (Crude Oil) $ 110 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

• भारत अपनी जरूरत का 85% तेल दूसरे देशों से खरीदता है।

• कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का सीधा खतरा मंडरा रहा है।

• ट्रांसपोर्ट महंगा होने से रोजमर्रा की चीजें जैसे दूध, सब्जी और राशन भी महंगे हो सकते हैं।

ईरान और उससे जुड़े देशों के बीच छिड़े युद्ध ने पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है। इस युद्ध का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल (Crude Oil) के बाजार पर पड़ा है। पिछले कुछ ही हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और ब्रेंट क्रूड $110 से $117 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। अब सबसे बड़ा सवाल जो हर भारतीय के मन में है- क्या हमारे देश में भी पेट्रोल और डीजल महंगे होने वाले हैं?

भारत पर इसका सीधा असर क्यों पड़ेगा?

भारत दुनिया के उन देशों में से है जो सबसे ज्यादा तेल बाहर से खरीदते हैं। हम अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल इम्पोर्ट (Import) करते हैं। जब भी ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का भाव 1 डॉलर भी बढ़ता है, तो भारतीय तेल कंपनियों पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। अगर इंटरनेशनल मार्केट में तेल महंगा होगा, तो भारत सरकार और तेल कंपनियों के लिए पुरानी कीमतों पर पेट्रोल-डीजल बेचना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

कंपनियों का नुकसान और आम जनता की जेब

जानकारों का मानना है कि जब तक कच्चा तेल $80 से $85 प्रति बैरल के आसपास रहता है, तब तक भारतीय तेल कंपनियों (जैसे Indian Oil, BPCL, HPCL) को खास नुकसान नहीं होता। लेकिन अब कीमत $100 के पार जा चुकी है।

अगर यह स्थिति कुछ और हफ्तों तक ऐसे ही बनी रही, तो तेल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा। दाम 2 रुपये से लेकर 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं, जो आम आदमी की जेब पर सीधा डाका होगा।

सिर्फ पेट्रोल नहीं, हर चीज होगी महंगी (महंगाई का खतरा)

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का मतलब सिर्फ गाड़ी चलाना महंगा होना नहीं है। इसका सीधा असर हर उस चीज पर पड़ता है जो ट्रक या मालगाड़ी से हमारे घर तक पहुंचती है।

1. ट्रांसपोर्टेशन: ट्रकों का किराया बढ़ जाएगा।

2. सब्जी और राशन: किराया बढ़ने से फल, सब्जी, दूध, आटा और दालें भी महंगी हो जाएंगी।

3. रोजमर्रा का खर्च: आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह से बिगड़ सकता है।

अगर युद्ध जल्दी रुक जाता है और सप्लाई लाइन (विशेषकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य का रास्ता) फिर से खुल जाती है, तो तेल की कीमतें वापस नीचे आ सकती हैं। लेकिन अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है और कच्चा तेल $120 या $150 तक पहुंचता है, तो भारत को एक बड़े आर्थिक झटके और भारी महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

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