आगरा/ उत्तर प्रदेश/7 मार्च 2026:

ज्ञान बांटने वाले हाथों ने जब अपराध का रास्ता चुना, तो आगरा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। तेलंगाना स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (Narcotics Bureau) और पुलिस के एक सफल संयुक्त अभियान में, रसायन विज्ञान (Chemistry) के एक शिक्षक को अवैध सिंथेटिक मादक पदार्थ ‘एमडीएमए’ बनाने और उसकी आपूर्ति करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

गिरफ्तार मुख्य आरोपी की पहचान 36 वर्षीय मनोज कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से फिरोजाबाद का निवासी है। पूर्व में जोधपुर के एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाने वाले मनोज ने अपने रसायन विज्ञान के ज्ञान का उपयोग समाज के निर्माण के बजाय मादक पदार्थों के निर्माण में किया। उसने इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी की सहायता से आगरा की एक किराए की दुकान में यह अवैध प्रयोगशाला स्थापित की थी।

गणित और रसायन विज्ञान का घातक गठजोड़

इस पूरे गिरोह की शुरुआत जोधपुर में हुई थी, जहाँ मनोज की मुलाकात गणित के एक अन्य शिक्षक वीरेंद्र कुमार से हुई। वीरेंद्र ने ही “शीघ्र धन कमाने” का प्रलोभन देकर मनोज को इस अपराध की दुनिया में धकेला।

• निर्माण: मनोज आगरा में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर मादक पदार्थ तैयार करता था।

• वितरण: वीरेंद्र इन मादक पदार्थों को इंटरनेट और अपने गुप्त संपर्कों के माध्यम से देश भर की रेव पार्टियों में ऊंचे दामों पर बेचता था।

छापेमारी और भारी बरामदगी:

जांच एजेंसियों ने सटीक सूचना के आधार पर सबसे पहले वीरेंद्र को हिरासत में लिया। उससे हुई गहन पूछताछ के बाद आगरा में मनोज के ठिकानों पर दबिश दी गई। इस त्वरित कार्रवाई में पुलिस ने अवैध प्रयोगशाला से मादक पदार्थ बनाने में प्रयुक्त होने वाला लगभग 1 करोड़ रुपये मूल्य का कच्चा माल बरामद किया है।

आगे की जांच जारी

पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब इस बात की विस्तृत जांच कर रही हैं कि इस मादक पदार्थ सिंडिकेट के तार किन-किन शहरों तक फैले हुए हैं, और इसमें कौन-कौन से सफेदपोश लोग शामिल हो सकते हैं। शिक्षा जैसे पवित्र पेशे से जुड़े व्यक्तियों का ऐसे संगीन अपराध में संलिप्त होना पूरे समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

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