नई दिल्ली/तेल अवीव:

ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे मौजूदा तनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक खबर आग की तरह फैल रही है। दावा किया जा रहा है कि ईरान ने अपनी एडवांस हाइपरसोनिक मिसाइल ‘फत्ताह’ (Fattah) का इस्तेमाल करके इज़राइल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘डिमोना’ (Dimona) परमाणु संयंत्र को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

लेकिन जब हमने इस दावे की पड़ताल की, तो सच्चाई कुछ और ही सामने आई। यह दावा पूरी तरह से झूठा और भ्रामक (Fake News) है। इज़राइल का परमाणु संयंत्र पूरी तरह सुरक्षित है।

क्या है वायरल दावे का सच?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे एक्स और टेलीग्राम) पर कुछ पुराने धमाकों और जंगलों में लगी आग के वीडियो शेयर करके यह अफवाह फैलाई जा रही है। हमारी पड़ताल में ये तथ्य सामने आए हैं:

हवा में ही नाकाम हुए हमले: यह सच है कि ईरान ने इज़राइल की तरफ कई मिसाइलें दागीं, जिनमें ‘फत्ताह’ मिसाइल के इस्तेमाल के दावे भी किए गए। लेकिन इज़राइल के अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम—विशेष रूप से एरो-2 (Arrow 2), एरो-3 (Arrow 3) और डेविड्स स्लिंग (David’s Sling)—ने अमेरिका और सहयोगी देशों की मदद से इन मिसाइलों को इज़राइल की सीमा में घुसने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया।

डिमोना की अभेद्य सुरक्षा: इज़राइल का नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर (डिमोना) दुनिया के सबसे सुरक्षित और कड़ी निगरानी वाले इलाकों में से एक है। इसके चारों ओर कई लेयर का सुरक्षा कवच है, जिसे भेदना किसी भी मिसाइल के लिए बेहद मुश्किल है।

• रेडिएशन का कोई सबूत नहीं: अगर किसी भी परमाणु संयंत्र पर इतना बड़ा हमला होता है, तो वहां से भारी मात्रा में रेडिएशन लीक होता है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और सैटेलाइट इमेजरी ने ऐसी किसी भी घटना या रेडिएशन स्पाइक की पुष्टि नहीं की है।

क्यों फैलाई जा रही है यह अफवाह?

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह अफवाह ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’ (Psychological Warfare) का एक हिस्सा है। युद्ध के समय अक्सर दुश्मन देश की जनता में खौफ और दहशत पैदा करने के लिए ऐसी झूठी खबरें फैलाई जाती हैं। ईरानी प्रोपेगेंडा और कुछ असत्यापित हैंडल्स जानबूझकर यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने इज़राइल को भारी नुकसान पहुंचाया है, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।

इज़राइल का न्यूक्लियर प्लांट तबाह होने की खबर एक सफेद झूठ है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे युद्ध से जुड़े किसी भी वायरल वीडियो या दावे पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और केवल प्रामाणिक न्यूज़ सोर्सेज पर ही विश्वास करें।

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