नई दिल्ली / यरूशलम:

सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि इज़रायल की संसद (Knesset) में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। हालाँकि, तथ्यों की पड़ताल करने पर यह दावा पूरी तरह से भ्रामक और गलत साबित हुआ है।

संसद में जो हंगामा या वॉकआउट हुआ, उसका प्रधानमंत्री मोदी से कोई संबंध नहीं था, बल्कि वह इज़रायल की घरेलू राजनीति का हिस्सा था।

विरोध की असली वजह क्या थी?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इज़रायली संसद में विपक्षी दल वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का विरोध कर रहे थे। इस विरोध का मुख्य कारण यह था कि नेतन्याहू सरकार ने इस विशेष कार्यक्रम में इज़रायल के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) इसाक अमित को आमंत्रित नहीं किया था। विपक्ष ने इसे प्रोटोकॉल और लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन मानते हुए सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

विपक्षी नेता ने पीएम मोदी को दी सफाई

इस घटनाक्रम के बीच, इज़रायल के प्रमुख विपक्षी नेता येर लैपिड (Yair Lapid) ने स्थिति को तुरंत स्पष्ट किया। उन्होंने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें संबोधित करते हुए साफ तौर पर कहा कि विपक्ष के इस विरोध और वॉकआउट का “आपसे (भारत के प्रधानमंत्री से) कोई लेना-देना नहीं है।”

भाषण के दौरान मिला ‘स्टैंडिंग ओवेशन’

विरोध की यह घटना केवल नेतन्याहू सरकार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक कदम था। जब पीएम मोदी का संबोधन शुरू होने वाला था, तब वॉकआउट करने वाले विपक्षी सांसद भी उन्हें सुनने के लिए सदन में वापस आ गए।

पीएम मोदी के ऐतिहासिक भाषण को न केवल सत्ता पक्ष, बल्कि विपक्ष ने भी पूरे सम्मान के साथ सुना। भाषण के दौरान और उसके समाप्त होने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सांसदों ने अपनी जगह पर खड़े होकर (स्टैंडिंग ओवेशन) तालियां बजाईं और उनके सम्मान में नारे लगाए।

निष्कर्ष:

इज़रायल की संसद में पीएम मोदी के खिलाफ विरोध होने की खबर पूरी तरह से एक ‘फेक न्यूज़’ है। विपक्षी सांसदों का गुस्सा अपनी ही सरकार के खिलाफ था, और उन्होंने पीएम मोदी को पूरा सम्मान दिया।

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