दिल्ली/ वाशिंगटन

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और दिग्गज रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ही अपने बेबाक, आक्रामक और ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) की नीति वाले बयानों के लिए जाने जाते हैं। उनकी कूटनीति (Diplomacy) का तरीका पारंपरिक राजनेताओं से काफी अलग है। ट्रंप अक्सर ऐसे बयान दे देते हैं, जिनका असर सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के शेयर बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में देखने को मिलता है। भारत भी उनके इन चौंकाने वाले बयानों से अछूता नहीं रहा है। बीते कुछ समय में ट्रंप ने भारत, पाकिस्तान, रूस और ब्रिक्स (BRICS) देशों को लेकर कई ऐसे दावे और चेतावनियां दी हैं, जिन्होंने भारतीय राजनीति और व्यापारिक क्षेत्र में भारी हलचल मचा दी।

आइए विस्तार से समझते हैं ट्रंप के उन 5 बड़े बयानों को, जिन्होंने भारत की टेंशन बढ़ाई।

1. भारत-पाक युद्ध रुकवाने का दावा और 200% टैरिफ की धमकी

हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा दावा किया जिसने भारतीय विदेश मंत्रालय को भी हैरान कर दिया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच एक संभावित और भयंकर युद्ध को रुकवाया था। उनके अनुसार, उन्होंने दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों को फोन करके धमकी दी थी कि यदि वे पीछे नहीं हटे, तो अमेरिका उन पर 200% आयात शुल्क (Tariffs) लगा देगा।

भारत पर असर: इस बयान से भारत में इसलिए हलचल मची क्योंकि भारत की हमेशा से यह स्पष्ट नीति रही है कि पाकिस्तान के साथ उसके मुद्दे द्विपक्षीय (Bilateral) हैं और इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता या दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भारत सरकार को कड़े शब्दों में इस दावे का खंडन करना पड़ा, जिससे कूटनीतिक तनाव की स्थिति पैदा हुई।

2. ब्रिक्स (BRICS) देशों को 100% टैरिफ की खुली चेतावनी

दुनिया भर में अमेरिकी डॉलर के दबदबे को कम करने (De-dollarization) की चर्चाओं के बीच ट्रंप का गुस्सा ब्रिक्स देशों पर फूटा। ट्रंप ने खुले तौर पर चेतावनी दी कि यदि ब्रिक्स देश (जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं) डॉलर का विकल्प तलाशने या किसी नई ब्रिक्स करेंसी (BRICS Currency) को बढ़ावा देने की कोशिश करते हैं, तो अमेरिका इन देशों से आने वाले सभी सामानों पर 100% टैरिफ लगा देगा।

भारत पर असर: भारत ब्रिक्स का एक अहम सदस्य है और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए रुपये में व्यापार (Rupee Trade) को बढ़ावा दे रहा है। ट्रंप की इस धमकी ने भारतीय निर्यातकों (Exporters) और शेयर बाजार में चिंता की लहर दौड़ा दी, क्योंकि अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है।

3. रूसी तेल की खरीद पर एतराज और 50% पेनाल्टी

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से भारी छूट पर कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदा। इस कदम ने पश्चिमी देशों को नाराज किया, लेकिन भारत अपने रुख पर कायम रहा। डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर सीधा भारत को निशाने पर लिया। उन्होंने भारतीय उत्पादों पर 50% तक के भारी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी, जिसमें से 25% पेनाल्टी विशेष रूप से रूसी तेल खरीदने के कारण लगाई गई थी।

भारत पर असर: इस दंडात्मक कार्रवाई से भारतीय व्यापार जगत में हड़कंप मच गया। भारत के कई प्रमुख निर्यात सेक्टर (जैसे कपड़ा, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मा) सीधे तौर पर प्रभावित होने लगे। हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता (Interim Trade Deal) हुआ, जिससे टैरिफ में कुछ राहत मिली, लेकिन ट्रंप के इस कदम ने दिखा दिया कि वे आर्थिक प्रतिबंधों का इस्तेमाल हथियार की तरह करते हैं।

4. भारत को ‘टैरिफ किंग’ (Tariff King) का टैग देना

डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि अमेरिका दूसरे देशों के उत्पादों पर कम टैक्स लगाता है, जबकि भारत जैसे देश अमेरिकी उत्पादों पर भारी टैक्स वसूलते हैं। उन्होंने कई मंचों से भारत को ‘टैरिफ किंग’ की उपाधि दी है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ‘हार्ले-डेविडसन’ (Harley-Davidson) मोटरसाइकिलों पर लगने वाला आयात शुल्क था, जिसे ट्रंप ने “अनुचित” (Unfair) बताया था।

भारत पर असर: ट्रंप के इस बयान के बाद भारत पर अमेरिकी दबाव काफी बढ़ गया। भारत को मजबूरन कुछ अमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क कम करना पड़ा। यह बयान लगातार भारतीय व्यापार नीतियों के लिए एक चुनौती बना रहा।

5. कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता का विवादित दावा (2019)

साल 2019 में जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अमेरिका के दौरे पर थे, तब प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया जिसने भारतीय संसद में भूचाल ला दिया। ट्रंप ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता (Mediation) करने का अनुरोध किया है।

भारत पर असर: कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और शिमला समझौते के तहत यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है। ट्रंप के इस दावे के तुरंत बाद भारतीय संसद में भारी हंगामा हुआ। तत्कालीन विदेश मंत्री एस. जयशंकर को संसद में खड़े होकर स्पष्टीकरण देना पड़ा कि पीएम मोदी ने कभी भी अमेरिकी राष्ट्रपति से ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है।

निष्कर्ष (Conclusion)

डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति ‘लेन-देन’ (Transactional) और ‘कठोर सौदेबाजी’ (Hard Bargaining) पर आधारित है। वे अपने आर्थिक हितों को साधने के लिए किसी भी देश पर दबाव बनाने से नहीं चूकते। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी बहुत मजबूत है, लेकिन ट्रंप के ये बयान साबित करते हैं कि व्यापार और अर्थशास्त्र के मोर्चे पर भारत को हमेशा सतर्क और आक्रामक कूटनीति के लिए तैयार रहना होगा।

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