रायसेन । मध्य प्रदेश:

रायसेन का ‘चमत्कारी’ बाबा या सिर्फ एक छलावा? 10वीं फेल सैलून संचालक के लग्ज़री शौक और विवादों की इनसाइड स्टोरी

आजकल सोशल मीडिया के दम पर कोई भी रातों-रात भगवान का रूप बन सकता है। मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले के सांचेत गांव से एक ऐसी ही हैरान करने वाली कहानी सामने आई है। यहां एक आम युवक, जो कुछ सालों पहले तक गांव में बाल काटने का काम करता था, आज महंगी गाड़ियों और बाउंसरों के घेरे में रहता है। खुद को ‘नाना काल भैरव धाम’ का सर्वेसर्वा बताने वाले सुनील सराठे की असल ज़िंदगी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है। इसमें आस्था के नाम पर दिखावा है, विवादित रसूख है, और अब मारपीट के पुलिस केस भी जुड़ गए हैं।

हेयर कटिंग की दुकान से ‘बाबा’ बनने की कहानी

सुनील सराठे की पढ़ाई 10वीं क्लास से आगे नहीं बढ़ पाई। गांव के लोग बताते हैं कि वह अपनी पुश्तैनी सैलून की दुकान चलाता था। लेकिन फिर उसने पैसा और नाम कमाने का नया रास्ता चुना। सोशल मीडिया का पूरा इस्तेमाल किया और इंटरनेट पर वीडियो डालकर ख़ुद को एक चमत्कारी बाबा के रूप में पेश करने लगा। देखते ही देखते उसकी पीआर (PR) टीम ने उसे एक साधारण इंसान से ‘स्वयंभू पीठाधीश्वर’ बना दिया।

सुरक्षा के नाम पर बाउंसरों का जमावड़ा

अमूमन संतों को उनकी सादगी के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां मामला बिल्कुल उल्टा है। सुनील सराठे को अब अपनी जान का ‘खतरा’ महसूस होता है, इसलिए वह हमेशा 3 से 4 प्राइवेट बाउंसर लेकर चलता है। अगर कोई बड़ा कार्यक्रम हो, तो यह संख्या 15 से 20 तक पहुंच जाती है। महंगी गाड़ियां और बॉडीगार्ड्स का ये काफ़िला देखकर गांव के सीधे-सादे लोग आसानी से उसके प्रभाव में आ जाते हैं।

घर में ‘हैवान’, बाहर ‘भगवान’: पत्नी की FIR से खुली पोल

दूसरों के दुख दूर करने का दावा करने वाले इस बाबा का असली चेहरा उसकी पत्नी आरती सेन (जिनकी शादी 11 जून 2015 को हुई थी) की पुलिस शिकायत से सामने आ गया है। देवनगर थाने में पत्नी की शिकायत पर सुनील सराठे और उसके भाई अनिल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज हो गया है। आरती का आरोप है कि उसने अपने एक रिश्तेदार की संपत्ति गिरवी रखकर सुनील के व्यवसाय के लिए करीब 12 लाख रुपए का कर्ज दिलवाया था। कुछ समय तक किस्तें जमा हुईं, फिर सुनील ने पैसे देना बंद कर दिए।

हद तो तब हो गई जब 2021 से उसने पत्नी को साथ रखना ही बंद कर दिया। आरती पर लगातार तलाक के लिए दबाव बनाया गया, उसके साथ गाली-गलौज और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना की गई। यहां तक कि देवर और पति ने मिलकर कई बार उसे जान से मारने की धमकियां भी दीं। फिलहाल भरण-पोषण का मामला भी कोर्ट में चल रहा है।

विवाद, लाठीचार्ज और परिवार की सच्चाई

दूसरों के दुख हरने का दावा करने वाले इस धाम के पीछे कई गहरे विवाद छिपे हैं। ताज़ा मामला मारपीट का है। काल भैरव धाम पर सराठे और विश्वकर्मा परिवार के बीच जमकर लाठियां चलीं। इस झगड़े में 78 साल के बुजुर्ग रामप्रसाद विश्वकर्मा बुरी तरह घायल हो गए, जिसके बाद यह मामला थाने तक पहुंच गया।

इतना ही नहीं, बाबा की अपनी पारिवारिक ज़िंदगी भी उलझी हुई है। साल 2015 में सुनील की शादी आरती सेन से हुई थी, लेकिन आपसी कलह के कारण आरती 2019 से ही विदिशा में अपने मायके में रह रही हैं। दोनों के बीच मकान और बैंक लोन को लेकर भी लंबी खींचतान चल रही है।

दागी साथी और ‘चमत्कार’ की हकीकत

सुनील को इस मुक़ाम तक पहुंचाने और राजनीतिक नेताओं तक उसकी पैठ बनाने में हर्षित तिवारी नाम के एक शख़्स का बड़ा हाथ बताया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस हर्षित पर किसानों का 1439 क्विंटल धान गबन करने का गंभीर आरोप है। ऐसे विवादित चेहरों के साथ मिलकर सुनील ने अपनी पहचान बढ़ाई।

बाबा का यह भी दावा है कि जो भी 5 शनिवार उनके यहां आता है, उसका हर तरह का नशा छूट जाता है। लेकिन हाल ही में कई बड़े न्यूज़ चैनलों ने जब अपने कैमरे के ज़रिए इसकी पड़ताल की और ‘ऑपरेशन पाखंड’ चलाया, तो इन दावों की पूरी तरह से हवा निकल गई।

यह पूरी कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस पर भरोसा कर रहे हैं। आस्था के नाम पर पनपते ऐसे ‘धाम’ अक्सर लोगों की भावनाओं और कमज़ोरियों का फ़ायदा उठाते हैं। ज़रूरत इस बात की है कि लोग आंखें मूंदकर किसी को अपना भगवान न मानें और ऐसे किसी भी पाखंड का हिस्सा बनने से पहले अपनी समझदारी का इस्तेमाल ज़रूर करें।

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