मिडिल ईस्ट में भड़के इस महायुद्ध की आंच अब उन छोटे और अमीर खाड़ी देशों तक पहुँच गई है, जिन्होंने कभी अपनी सत्ता बचाने के लिए अमेरिका को गले लगाया था। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जिस तरह से पलटवार किया है, उससे कतर और ओमान जैसे देशों में जबरदस्त दहशत फैल गई है।

जिन अमेरिकी सैन्य बेसों (Military Bases) को इन देशों ने अपना ‘सुरक्षा कवच’ माना था, आज वही बेस इनके लिए ‘टाइम बम’ बन चुके हैं।

आइए जानते हैं इस वक्त कतर और ओमान के भीतर कैसा खौफ है और वहां के हालात क्या हैं:

🇶🇦 कतर में दहशत: ‘अल उदीद’ बेस बना सबसे बड़ा सिरदर्द

कतर की राजधानी दोहा में इस वक्त सन्नाटा और खौफ पसरा है। कतर ने 90 के दशक में अपनी जेब से अरबों डॉलर खर्च करके ‘अल उदीद एयर बेस’ (Al Udeid Air Base) बनाया था और अमेरिका को सौंपा था ताकि कोई पड़ोसी देश उस पर आंख न उठा सके।

डर की वजह: ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि जिस भी देश की जमीन से अमेरिका ईरान पर हमले करेगा, उसे दुश्मन माना जाएगा। ‘अल उदीद’ मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा बेस है, जहाँ से अमेरिकी फाइटर जेट्स और बमवर्षक विमान उड़ान भर रहे हैं।

• हालात: कतर को डर है कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें अगर इस बेस पर गिरती हैं, तो पूरा दोहा शहर तबाह हो सकता है। कतर की सरकार लगातार वाशिंगटन और तेहरान दोनों से गुहार लगा रही है कि उनके देश को इस युद्ध का अखाड़ा न बनाया जाए।

🇴🇲 ओमान की उड़ी नींद: ‘शांतिदूत’ के घर में युद्ध की आहट

ओमान, जिसे हमेशा से मिडिल ईस्ट का ‘स्विट्जरलैंड’ या शांतिदूत (Mediator) कहा जाता है, आज बुरी तरह घबराया हुआ है। ओमान हमेशा से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करता आया है, लेकिन अब हालात उसके हाथ से निकल चुके हैं।

• डर की वजह: ओमान ने अपने बंदरगाहों और एयरबेस का एक्सेस अमेरिकी सेना को दे रखा है। इसके ठीक सामने ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) है, जहाँ ईरान की नेवी और मिसाइलें तैनात हैं।

• हालात: ओमान के सुल्तान को डर है कि अगर अमेरिका उनके समुद्री या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करके ईरान पर बड़े हमले करता है, तो ईरान पलटकर ओमान के तेल ठिकानों और बंदरगाहों को खाक में मिला देगा। ओमान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तेल निर्यात और व्यापार पर टिकी है, जो एक झटके में खत्म हो सकती है।

⚠️ ‘बॉडीगार्ड’ ही बन गया जान का दुश्मन!

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कतर, ओमान और यूएई ने अमेरिका को अपना ‘किराए का बॉडीगार्ड’ समझकर अपने घर में बिठाया था। उन्हें लगा था कि अमेरिका के नाम से ही ईरान डर जाएगा। लेकिन आज पासा पलट चुका है। ईरान अब सीधे अमेरिका से भिड़ रहा है, और बीच में ये छोटे खाड़ी देश पिस रहे हैं।

इन देशों के शेख और राजपरिवार अब समझ नहीं पा रहे हैं कि वे अमेरिका का साथ दें (जिसकी सेना उनके देश में बैठी है) या ईरान से माफी मांगें (जिसकी मिसाइलें उनकी तरफ मुड़ी हुई हैं)।

error: Content is protected !!