वाशिंगटन/तेहरान, 10 फरवरी 2026: मध्य पूर्व (Middle East) एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से चला आ रहा तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक सीधी और कड़ी चेतावनी के बाद, पेंटागन ने फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में अपनी सैन्य ताकत झोंक दी है। इस कदम ने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आशंका से भर दिया है। क्या है ताज़ा घटनाक्रम? पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने अपने एक शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (जंगी जहाजों का बेड़ा) को तुरंत खाड़ी क्षेत्र में पोजिशन लेने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी एयरबेसों पर अत्याधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स और B-52 स्ट्रैटेजिक बमवर्षकों को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा गया है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान के कुछ घंटों बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने ईरान को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी थी। ट्रम्प ने कहा, “अगर ईरान ने किसी भी अमेरिकी नागरिक या अमेरिकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की जरा भी जुर्रत की, तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा जैसा उसने इतिहास में कभी नहीं देखा होगा। यह हमारी अंतिम चेतावनी है।” ईरान का पलटवार: ‘हम युद्ध के लिए तैयार’ अमेरिका के इस आक्रामक रुख पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने अमेरिकी सैन्य तैनाती को “क्षेत्र की शांति के लिए सीधा खतरा” और “खुली उकसावे की कार्रवाई” करार दिया है। ईरान की एलीट फोर्स ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने अपनी सभी मिसाइल यूनिट्स और नौसेना को युद्ध स्तर की तैयारी रखने का आदेश दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने धमकी दी है कि अगर उन पर हमला हुआ, तो वे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह ब्लॉक कर देंगे। दुनिया भर में तेल संकट का डर अमेरिका और ईरान के बीच जंग की आहट से वैश्विक बाजारों में हड़कंप मच गया है। कच्चे तेल की कीमतें रातोंरात उछल गई हैं। दुनिया का लगभग 20% तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। अगर ईरान इसे बंद करता है या यहाँ कोई सैन्य टकराव होता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग लग सकती है और एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। निष्कर्ष: नाजुक मोड़ पर दुनिया संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय संघ ने दोनों पक्षों से तत्काल संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। हालांकि, जिस तेजी से खाड़ी में सैन्य जमावड़ा बढ़ रहा है, उसे देखते हुए राजनयिक समाधान की उम्मीदें कम होती जा रही हैं। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि वाशिंगटन या तेहरान में से पहला कदम कौन उठाता है—शांति की ओर या महायुद्ध की ओर। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation लोकसभा स्पीकर के खिलाफ विपक्ष का ‘हल्ला बोल’ ! अमेरिका के सामने ईरान का बड़ा दांव! परमाणु बम बनाने के करीब पहुंचा यूरेनियम घटाने को तैयार, लेकिन रखी यह शर्त