देहरादून: चारधाम और हेमकुंड साहिब की पवित्र यात्रा के बीच उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इस समय कानून-व्यवस्था को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। चमोली के कर्णप्रयाग क्षेत्र से शुरू हुआ एक मामूली विवाद अब उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बॉर्डर तक पहुंच चुका है। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कई तरह की अफवाहें और दावे तैर रहे हैं, जिनमें मुफ्त लंगर सेवा और स्थानीय होटल व्यवसायियों के बीच टकराव की बात कही जा रही है। आइए गहराई से समझते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम की जमीनी सच्चाई क्या है।

कैसे हुई इस पूरे विवाद की शुरुआत?

इस तनाव की नींव 16 जून 2026 को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में पड़ी। चश्मदीदों और पुलिस के मुताबिक, हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए जा रहे निहंग सिखों के एक समूह और स्थानीय निवासियों के बीच वाहनों की पार्किंग और रास्ता देने को लेकर कहासुनी हो गई थी। यह बहस देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई, जिसमें तलवारें चलने की बात सामने आई। इस मारपीट में कुछ स्थानीय लोग जख्मी हुए, जिसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 निहंग सिखों को हिरासत में ले लिया।

लंगर बनाम होटल व्यवसाय: दावों में कितनी सच्चाई?

घटना के बाद इंटरनेट पर एक नैरेटिव तेजी से फैलाया गया कि स्थानीय होटल संचालक और व्यापारी वहां चल रहे लंगर का विरोध कर रहे थे। दावा किया गया कि मुफ्त भोजन मिलने की वजह से यात्रियों ने होटलों में जाना बंद कर दिया था, जिससे दुकानदारों की कमाई प्रभावित हो रही थी और इसी खुन्नस में लंगर के टेंट और धार्मिक ध्वज को हटाने की कोशिश की गई।

प्रशासन और पुलिस की जांच रिपोर्ट:

हालांकि, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की तफ्तीश में असल वजह कुछ और ही निकलकर सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार:

 अवैध जगह का मुद्दा: विवाद होटल की कमाई का नहीं, बल्कि लंगर लगाने के स्थान को लेकर था। स्थानीय व्यापार मंडल और नगर पालिका का आरोप था कि मुख्य हाईवे के बिल्कुल किनारे संकरी सड़क पर बिना अनुमति के टेंट लगाने से पहाड़ों में गंभीर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही थी।

 सुरक्षा को खतरा: पुलिस ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय प्रशासन लंगर सेवा के खिलाफ नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से उन्हें किसी सुरक्षित या निर्धारित स्थान पर लंगर संचालित करने की सलाह दी गई थी। इसी बात पर दोनों पक्षों में गलतफहमी हुई और मामला बढ़ गया।

नगरासू में विरोध और बॉर्डर पर पुलिस से झड़प

अपने साथियों की गिरफ्तारी के विरोध में पंजाब के कई निहंग जत्थों में आक्रोश फैल गया। 20 जून को निहंगों के एक समूह ने बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नगरासू गुरुद्वारे की छत पर मोर्चा संभाल लिया। प्रशासन द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच और स्थानीय लोगों पर भी क्रॉस-FIR दर्ज करने के आश्वासन के बाद यह गतिरोध शांत हुआ।

लेकिन माहौल तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया जब 25 जून की रात को पंजाब और मोहाली की तरफ से आ रहे लगभग 150 से 200 निहंग सिखों के एक बड़े जत्थे ने उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करने की कोशिश की। देहरादून के कुल्हाल चेक पोस्ट (उत्तराखंड-हिमाचल सीमा) पर तैनात पुलिस बल ने जब उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की, तो वहां तीखी झड़प हुई और बैरिकेड्स टूट गए।

वर्तमान स्थिति: प्रशासन को मिला अल्टीमेटम

बॉर्डर पर बने हालातों को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस के साथ-साथ आईटीबीपी (ITBP) के जवानों को भी मोर्चे पर तैनात किया गया है। अधिकारियों और निहंग नेताओं के बीच देर रात हुई लंबी बातचीत के बाद फिलहाल निहंग सिख हिमाचल प्रदेश के पोंटा साहिब गुरुद्वारे में ठहर गए हैं।

सिख जत्थों ने उत्तराखंड प्रशासन को 2 दिन का समय दिया है कि गिरफ्तार किए गए चारों निहंग सिखों को जल्द से जल्द रिहा किया जाए, वरना वे दोबारा उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करने के लिए मार्च करेंगे। फिलहाल खुफिया एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन दोनों पक्षों को समझाने और मामले का शांतिपूर्ण हल निकालने के प्रयास में जुटे हैं।

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