न्यूयॉर्क/संयुक्त राष्ट्र |

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के बड़े पैमाने पर हुए संयुक्त सैन्य हमलों (जिसे अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है) के बाद, चीन और रूस ने को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक आपातकालीन बैठक (Emergency Meeting) बुलाई। दोनों देशों ने मध्य पूर्व में तेजी से बिगड़ते हालात और युद्ध के वैश्विक स्तर पर फैलने की आशंका के बीच तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है।

बैठक के मुख्य बिंदु और कूटनीतिक विवाद

• बैठक का एजेंडा: चीन और रूस ने स्पष्ट रूप से मांग की थी कि यह आपातकालीन बैठक “अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा” (Threats to international peace and security) एजेंडे के तहत आयोजित की जाए। उन्होंने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई को संप्रभु देश (ईरान) के खिलाफ “अकारण और लापरवाह सैन्य आक्रामकता” करार दिया।

• ब्रिटेन के साथ टकराव: फरवरी महीने के लिए UNSC की अध्यक्षता ब्रिटेन के पास थी। ब्रिटेन ने रूस और चीन की मांग को दरकिनार करते हुए इस बैठक को “मध्य पूर्व की स्थिति” (The situation in the Middle East) एजेंडे के तहत निर्धारित किया।

• रूस की कड़ी प्रतिक्रिया: संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंजिया (Vassily Nebenzia) ने ब्रिटेन के इस फैसले का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को केवल मध्य पूर्व तक सीमित बताना इस खतरे की गंभीरता को कम आंकना है, क्योंकि इस हमले को अंजाम देने वाला एक मुख्य देश (अमेरिका) इस क्षेत्र का हिस्सा ही नहीं है।

• ईरान का पक्ष: ईरान ने भी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 (आत्मरक्षा के अधिकार) का हवाला देते हुए सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखा। ईरान ने मांग की कि परिषद अमेरिका और इजरायल की इस “गैरकानूनी आक्रामकता” को रोकने और जवाबदेही तय करने के लिए तत्काल उपाय करे।

पृष्ठभूमि: क्यों बुलाई गई यह बैठक?

अमेरिका और इजरायली वायु सेना ने ईरान के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में लगभग 500 सैन्य, मिसाइल रक्षा प्रणालियों और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाते हुए भारी बमबारी की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे ईरान के शासन और परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने का प्रयास बताया।

इस हमले के तुरंत बाद, ईरान ने “करारा जवाब” (Crushing Response) देते हुए इज़रायल और इराक, जॉर्डन, बहरीन, कतर तथा यूएई (UAE) में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स से कई हमले किए। इस भारी सैन्य टकराव ने पूरे विश्व में चिंता पैदा कर दी है, जिसके चलते चीन और रूस ने कूटनीतिक मंच पर ईरान का समर्थन करते हुए युद्धविराम और शांति की अपील की है।

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