नई दिल्ली/वॉशिंगटन:

मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इज़राइल के बीच तनाव अब एक बड़े युद्ध में बदल चुका है। ईरान के कड़े जवाबी हमलों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ जहाँ अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता के ग्राफ में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, वहीं वैश्विक मंच पर शांति कायम करने के लिए अब दुनिया की निगाहें भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिक गई हैं।

कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि इस महायुद्ध को रोकने के लिए पीएम मोदी को मुख्य मध्यस्थ (mediator) या शांति दूत के रूप में आगे किया जा सकता है।

पीएम मोदी ही क्यों? भारत की मजबूत स्थिति के 3 मुख्य कारण

अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय भारत दुनिया के गिने-चुने देशों में से है, जो इस तनाव को कम करने की ताकत रखता है। इसके मुख्य कारण हैं:

• दोनों पक्षों से गहरी दोस्ती: भारत के संबंध इज़राइल के साथ बेहद मजबूत हैं, खासकर रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के साथ भी भारत के ऐतिहासिक और व्यापारिक रिश्ते रहे हैं। भारत एकमात्र ऐसा बड़ा देश है जिसकी बात दोनों देश ध्यान से सुन सकते हैं।

• शांति का स्पष्ट संदेश: भारत ने हमेशा यह स्टैंड लिया है कि “यह युद्ध का युग नहीं है”। पीएम मोदी ने इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध में भी कूटनीति (diplomacy) और बातचीत के जरिए हल निकालने पर जोर दिया था।

अमेरिका का बदलता रुख: अमेरिका में ट्रंप के नेतृत्व को लेकर घरेलू राजनीति में जो उठा-पटक चल रही है, उसके कारण अमेरिका इस विवाद को अकेले सुलझाने में संघर्ष कर रहा है। ऐसे में अमेरिका भी भारत की मध्यस्थता का समर्थन कर सकता है।

भारत के अपने हित भी हैं दांव पर

इस युद्ध को रुकवाना सिर्फ दुनिया के लिए ही नहीं, बल्कि खुद भारत के लिए भी बहुत जरूरी है।

• मध्य पूर्व के देशों में लगभग 90 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत सरकार की पहली प्राथमिकता है।

• इसके अलावा, भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल (petroleum) इसी क्षेत्र से आयात (import) करता है। युद्ध लंबा खिंचने पर तेल के दाम बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर भारत की महंगाई पर पड़ेगा।

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