शहीद और घायल जवानों के सम्मान की लड़ाई अब रुकेगी नहीं। राहुल गांधी ने जवान अजय मलिक से मिलकर CAPF के जवानों को उनका वाजिब हक दिलाने का वादा किया। नई दिल्ली: हमारे देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में सालों से सुलग रहा प्रमोशन विवाद अब एक बड़ा राजनीतिक तूफान बनने जा रहा है। अग्निवीर योजना के बाद, अब विपक्ष के नेता राहुल गांधी CAPF अधिकारियों के हक की आवाज उठाने की पूरी तैयारी में हैं। देश के 10 लाख से ज्यादा जवानों और अधिकारियों से जुड़ा यह मुद्दा सीधा मोदी सरकार और IPS लॉबी के वर्चस्व को चुनौती दे रहा है। आखिर यह पूरा विवाद क्या है, मोदी सरकार का रुख क्या रहा है और अब राजनीति इसमें क्या नया मोड़ लाने वाली है। 1. क्या है असली विवाद: ‘जंगल में पसीना बहाए कैडर, मलाई खाएं IPS’ CAPF के अंतर्गत देश के 7 बड़े सुरक्षा बल आते हैं (जैसे BSF, CRPF, CISF, ITBP आदि)। इनमें अधिकारियों की भर्ती UPSC के जरिए ‘असिस्टेंट कमांडेंट’ के पद पर होती है। इन्हें ‘कैडर ऑफिसर’ (Cadre Officer) कहा जाता है। • समस्या क्या है? ये कैडर अधिकारी अपनी पूरी जवानी बॉर्डर, नक्सल इलाकों और कश्मीर जैसी मुश्किल जगहों पर बिताते हैं। लेकिन जब प्रमोशन होकर सबसे ऊंचे पदों (जैसे IG, ADG या फोर्स का मुखिया DG) पर जाने की बारी आती है, तो ये पद IPS अधिकारियों के लिए रिजर्व कर दिए जाते हैं। • राज्य पुलिस से IPS अधिकारी कुछ सालों की ‘डेप्युटेशन’ पर आते हैं और सीधे फोर्स के बॉस बन जाते हैं। इस वजह से CAPF के अपने अधिकारी 10 से 15 साल तक एक ही रैंक पर अटके रहते हैं और बिना अपनी फोर्स का मुखिया बने रिटायर हो जाते हैं। 2. सुप्रीम कोर्ट का चाबुक और मोदी सरकार का रुख अधिकारियों ने अपने हक के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने CAPF कैडर अधिकारियों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। • कोर्ट ने आदेश दिया कि इन अधिकारियों को ‘ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस’ (OGAS) का दर्जा दिया जाए। • सरकार का रुख: शुरुआत में मोदी सरकार इसके बिल्कुल खिलाफ थी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की थी कि CAPF को ये दर्जा न मिले। लेकिन कोर्ट के सख्त आदेश के आगे सरकार को झुकना पड़ा। • क्या मिला और क्या नहीं? सरकार ने कोर्ट के कहने पर अधिकारियों को NFFU (पैसे और सैलरी बढ़ने का फायदा) तो दे दिया, लेकिन असली ‘पावर और कुर्सी’ आज भी नहीं दी। सरकार आज भी यही चाहती है कि इन बलों का कंट्रोल पूरी तरह से IPS अधिकारियों के ही हाथ में रहे। 3. राहुल गांधी की एंट्री: मोदी सरकार के लिए नई टेंशन सूत्रों के मुताबिक, अब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को एक बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन बनाने जा रहे हैं। विपक्ष इसे सीधे तौर पर जवानों के मनोबल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है। कांग्रेस किन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी? • जवानों के साथ सौतेला व्यवहार: जो अधिकारी सालों तक गोली खाते हैं, उन पर मोदी सरकार भरोसा क्यों नहीं कर रही है? बाहर से IPS लाकर उन्हें मुखिया क्यों बनाया जा रहा है? • सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी: सरकार ने सिर्फ पैसे बढ़ाकर खानापूर्ति कर दी है, लेकिन अधिकारियों को उनका असली सम्मान (लीडरशिप) नहीं दिया। • बड़ा वोट बैंक: देश में 10 लाख CAPF जवान हैं। उनके परिवारों को जोड़ लें तो यह करोड़ों लोगों का मामला है। कांग्रेस इस बड़े वर्ग की नाराजगी को सरकार के खिलाफ भुनाना चाहती है। आगे क्या होगा? CAPF अधिकारी अब सिर्फ अच्छी सैलरी नहीं, बल्कि अपनी फोर्स का नेतृत्व (DG पद) चाहते हैं। अगर राहुल गांधी इस मुद्दे को सड़क और संसद में जोर-शोर से उठाते हैं, तो मोदी सरकार के लिए अग्निवीर के बाद यह जवानों से जुड़ा दूसरा सबसे बड़ा सिरदर्द बन सकता है। देखना यह होगा कि क्या सरकार IPS लॉबी का दबाव कम करके CAPF अधिकारियों को उनका असली हक देगी या यह सिर्फ एक सियासी मुद्दा बनकर रह जाएगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation लोकसभा में बड़ा समझौता: 8 निलंबित सांसदों की कल होगी वापसी, सर्वदलीय बैठक में सुलझा विवाद सदन में शिवराज का बड़ा हमला: ‘गांधी जी ने कहा था कांग्रेस खत्म करो’, बयान पर विपक्ष हुआ आगबबूला