भोपाल:

मध्य प्रदेश में अब मिलावटखोरों की खैर नहीं। आम जनता की सेहत को सबसे ऊपर रखते हुए मध्य प्रदेश शासन और मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एक नई और सख्त पहल शुरू की है। प्रदेश भर में दूध, मावा और पनीर जैसे रोजमर्रा के जरूरी उत्पादों में होने वाली मिलावट को रोकने के लिए आधुनिक ‘मिल्क रैपिड टेस्टिंग किट’ के जरिए सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है।

​इस नई व्यवस्था के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमें सीधे मैदान में उतर चुकी हैं। शहर की विभिन्न डेयरियों, मिष्ठान भंडारों और दूध उत्पादक केंद्रों पर औचक निरीक्षण कर ऑन-द-स्पॉट (मौके पर ही) सैंपलिंग और प्राथमिक जांच की जा रही है। इस तकनीक के आने से मिलावटी दूध और उससे बने नकली उत्पादों की तुरंत पहचान हो सकेगी, जिससे मिलावट के धंधे में लगे लोगों पर फौरन शिकंजा कसा जा सकेगा।

अधिकारियों की नई पहल: जनता को भी बना रहे ‘जांच में सक्षम’

इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी केवल दुकानों की जांच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सीधे नागरिकों के बीच पहुंच रहे हैं। विभाग द्वारा प्रदेश के हर जिले में ये किट बांटी गई हैं। इसके साथ ही एक बड़ा जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसमें आम लोगों को दूध, मावा और पनीर में होने वाली मिलावट को खुद पहचानने के बेहद आसान और घरेलू तरीके सिखाए जा रहे हैं।

सेहत से खिलवाड़ करने वालों को सख्त संदेश

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने साफ कर दिया है कि त्योहारों या आम दिनों में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। मौके पर ही होने वाले इस त्वरित परीक्षण से मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर तुरंत रोक लगेगी। प्रशासन की इस सक्रियता से जहां एक तरफ मिलावटखोरों में खलबली मची है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं में शुद्ध खान-पान को लेकर भरोसा और जागरूकता दोनों बढ़े हैं।

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