भोपाल

​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में अधोसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर), रख-रखाव और संचालन व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने के कड़े दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एक विशेष अभियान चलाकर सभी सरकारी स्कूलों में मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाए।

बुनियादी सुविधाओं और आधुनिक निर्माण पर रहेगा जोर

​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि:

  • ​सभी विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, नियमित साफ-सफाई और सुव्यवस्थित शौचालयों की पुख्ता व्यवस्था हो।
  • ​नए निर्माण कार्यों को गति दी जाए और तकनीक आधारित नवाचारों को निरंतर बढ़ावा मिले।
  • ​विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

जनभागीदारी, पूर्व छात्रों और उद्योग जगत का सहयोग

​शैक्षणिक संस्थानों के समग्र विकास के लिए मुख्यमंत्री ने जनभागीदारी पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों (Alumni), उद्योग जगत और निवेशकों को स्कूलों के विकास से जोड़ा जाए, ताकि उनके सहयोग और CSR फंड से शैक्षणिक व्यवस्था को और अधिक गति मिल सके।

ई-अटेंडेंस और छात्रवृत्ति वितरण की समीक्षा

​बैठक में विभाग की प्रमुख उपलब्धियों और योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई:

  • ई-अटेंडेंस: स्कूलों में ई-अटेंडेंस व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
  • पारदर्शी छात्रवृत्ति वितरण: शिक्षा पोर्टल के माध्यम से पिछले 2 वर्षों में करीब 1.25 करोड़ विद्यार्थियों के बैंक खातों में ₹696 करोड़ की छात्रवृत्ति का ऑनलाइन भुगतान किया गया है।
  • स्वच्छ एवं हरित विद्यालय: पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले प्रदेश के 2 विद्यालयों को पुरस्कृत किया गया है।

​मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत योजनाओं और निर्माण कार्यों को समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए ताकि हर विद्यार्थी को बेहतर शिक्षा मिल सके।

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