भोपाल/बैतूल: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के रहने वाले 24 वर्षीय सुनील बोसमाकर के परिजनों ने अपने गहरे दुख के बीच एक ऐसा फैसला लिया, जो मानवता की मिसाल बन गया है। सुनील को डॉक्टरों द्वारा ब्रेन-डेड घोषित किए जाने के बाद, उनके परिवार ने अंगदान की सहमति देकर 3 गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जीवनदान दिया।

एम्स भोपाल में हुआ चौथा सफल अंगदान

सुनील के शरीर से लिवर और दोनों किडनियां सुरक्षित निकाली गईं। एम्स (AIIMS) भोपाल में ब्रेन-डेड डोनर से यह 4th सफल अंगदान दर्ज किया गया है।

 लिवर और एक किडनी: इनका सफल प्रत्यारोपण एम्स भोपाल में ही भर्ती जरूरतमंद मरीजों में किया गया।

 दूसरी किडनी: इसे बंसल अस्पताल भोपाल के मरीज के लिए भेजा गया।

ग्रीन कॉरिडोर बनाकर समय पर पहुंचाया गया अंग

किडनी को एम्स भोपाल से बंसल अस्पताल तक बिना किसी ट्रैफिक रुकावट के तेजी से पहुंचाने के लिए भोपाल पुलिस और प्रशासन की मदद से विशेष ‘ग्रीन कॉरिडोर’ तैयार किया गया। डॉक्टरों की टीम ने समय रहते अंग को अस्पताल पहुंचाकर मरीज में सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया।

मानवता के लिए मिसाल बना परिवार का फैसला

सुनील आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका यह निःस्वार्थ योगदान 3 परिवारों के घरों में खुशियां लौटा लाया है। अस्पताल प्रबंधन और समाज के लोगों ने शोकग्रस्त परिवार के इस साहसी और मानवीय कदम की सराहना की है।

अंगदान करें—जीवनदान दें। आपका एक फैसला कई जिंदगियों को बचा सकता है।

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