अयोध्या राम मंदिर में बड़ा घोटाला? रामलला के दान और सोने-चांदी की हेराफेरी के आरोपों पर SIT जांच शुरू

अयोध्या ब्यूरो | जून 2026

अयोध्या: जिस पावन नगरी और राम मंदिर के नाम पर दशकों तक देश की राजनीति घूमती रही, जहाँ भव्य मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई का अंश दान कर दिया, आज उसी मंदिर परिसर से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने हर सनातनी और रामभक्त को झकझोर कर रख दिया है।

आरोप लग रहे हैं कि जिन रामलला के नाम पर देश में इतनी राजनीति हुई, खुद उनके मंदिर के भीतर आस्था के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात हुआ है। राम मंदिर के गर्भगृह और दान पेटी से करोड़ों रुपये के कैश, सोने की गदा और कीमती आभूषणों के गायब होने का शक गहरा गया है। विपक्ष के तीखे हमलों के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में एक हाई-लेवल जांच (SIT Probe) के आदेश दे दिए हैं।

क्या है पूरा मामला? क्यों उठे रामलला के दान पर सवाल?

विवाद की शुरुआत जून 2026 के पहले हफ्ते में हुई, जब समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने मंदिर के वीआईपी प्रबंधन और दान में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए।

मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, मंदिर में चढ़ाए गए करीब 2 किलोग्राम वजनी सोने की गदा, कीमती आभूषण और दान पेटियों से करोड़ों रुपये का कैश गायब होने की आशंका जताई गई है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यह सवाल तैरने लगा है कि जो परिसर देश के सबसे सुरक्षित और वीवीआईपी क्षेत्रों में से एक है, वहाँ इतनी बड़ी हेराफेरी कैसे संभव है?

एक्शन में सरकार: 3 सदस्यीय SIT गठित, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

मामले की संवेदनशीलता और जनभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया है। सरकार द्वारा एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी (IG) किरण एस. और स्पेशल सेक्रेटरी (फाइनेंस) नील रतन शामिल हैं।

SIT को निर्देश दिए गए हैं कि वे 7 दिनों के भीतर अपनी शुरुआती रिपोर्ट और 15 दिनों के अंदर पूरी विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंपें।

जांच में सामने आए ये 3 चौंकाने वाले मोड़:

 कर्मचारी के घर से कैश बरामद: शुरुआती जांच के दौरान मंदिर परिसर से जुड़े एक कर्मचारी के घर पर छापेमारी की गई, जहाँ से करीब 20 लाख रुपये का संदिग्ध कैश बरामद होने की खबर है।

 8 महीने का CCTV फुटेज डिलीट करने की साजिश: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक आरोपी कर्मचारी द्वारा पिछले 8 महीनों का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज डिलीट करने की कोशिश की गई, ताकि सबूतों को मिटाया जा सके। अब फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स इस डेटा को रिकवर करने में जुटे हैं।

 44 कर्मचारी रडार पर: इस मामले में बैंक अधिकारियों, कलेक्शन एजेंसी और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के करीब 44 कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने क्या कहा?

इस भारी विवाद के बीच ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने अपनी स्थिति साफ की है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि मंदिर के सभी वित्तीय लेन-देन का ऑडिट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के प्रतिनिधियों की देखरेख में पारदर्शी तरीके से होता है।

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि अफवाहों और भ्रामक खबरों पर लगाम लगाने तथा दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए उन्होंने खुद सरकार से स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का अनुरोध किया था।

राम मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की आस्था का सर्वोच्च केंद्र है। ऐसे में अगर रामलला के चरणों में अर्पित की गई सोने-चांदी की शिलाओं या दान राशि में एक रुपये की भी हेराफेरी हुई है, तो यह सिर्फ एक वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के भरोसे के साथ किया गया सबसे बड़ा छल है।

अब सबकी निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि इस कथित ‘महाघोटाले’ के पीछे कौन से बड़े चेहरे छिपे हैं।

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