रायसेन। मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में संविदा कर्मचारियों के तबादलों को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। नियमों और मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार करते हुए रायसेन जिले के ओबेदुल्लागंज ब्लॉक में पदस्थ दो महिला कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) का ट्रांसफर करीब 350 किलोमीटर दूर शिवपुरी जिले में कर दिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि इन महिला कर्मचारियों ने ट्रांसफर की कोई मांग नहीं की थी, लेकिन उनकी जगह दूसरे जिलों से आए पसंदीदा कर्मचारियों को उपकृत करने के लिए यह पूरी व्यूहरचना रची गई।

तबादला नीति के तहत जिस दिन इन दोनों महिला स्वास्थ्यकर्मियों की सीटें खाली कराई गईं, ठीक उसी दिन जारी एक दूसरे आदेश में अन्य जिलों से आए कर्मचारियों को वहां तैनात भी कर दिया गया। इस दोहरे आदेश ने विभाग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लाचार व्यवस्था: पॉलिसी में ‘नजदीक रखने का नियम’, जमीनी हकीकत उलटी

मध्य प्रदेश शासन की ट्रांसफर गाइडलाइन साफ कहती है कि महिला कर्मचारियों और संविदा पर कार्यरत स्टाफ को उनके गृह जिले या नजदीकी क्षेत्रों में ही पदस्थापना दी जाए। इसका उद्देश्य यह है कि वे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक तालमेल बिठाकर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकें। लेकिन रायसेन के इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों ने इस नीति को पूरी तरह हवा में उड़ा दिया।

पारिवारिक संकट: नवजात बच्ची और कैंसर पीड़ित मां को छोड़ कैसे जाएं शिवपुरी?

जबरन ट्रांसफर का शिकार हुईं दोनों महिला स्वास्थ्यकर्मियों की पारिवारिक स्थिति बेहद संवेदनशील है, जिसे विभाग ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया:

 मासूम बच्ची का साथ छूटा: माहोली उप स्वास्थ्य केंद्र में तैनात दुर्गा (NHM261951) की महज 5 महीने की छोटी बेटी है। इतनी कम उम्र की बच्ची को लेकर रायसेन से 350 किलोमीटर दूर शिवपुरी के करेरा (सिलानगर) में नई जगह पर ड्यूटी संभालना उनके लिए एक बड़ी प्रताड़ना जैसा है।

 बीमार मां की देखभाल लाचार: सालकानी उप स्वास्थ्य केंद्र की खुशबू विश्वकर्मा (NHM262074) को भी शिवपुरी के करेरा (सेमरा न्यू) भेज दिया गया है। खुशबू की मां कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही हैं। इस ट्रांसफर के बाद उनके सामने मां के इलाज और देखभाल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

दोनों पीड़ित कर्मचारियों ने विभागीय स्तर पर ट्रांसफर रुकवाने की काफी कोशिशें कीं, लेकिन जब दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई, तो अब उन्होंने न्याय के लिए कोर्ट (न्यायालय) जाने का फैसला किया है।

पोर्टल का खेल और ‘बैक-टू-बैक’ सरकारी आदेश

इस पूरे मामले में प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर जो शक के दायरे बन रहे हैं, उसकी वजह 14 जून को जारी हुए दो अलग-अलग सरकारी आदेश हैं:

1 पहला कदम (आदेश क्रमांक 1336): इस आदेश के जरिए रायसेन में जमीनी स्तर पर काम कर रहीं दुर्गा और खुशबू का ट्रांसफर शिवपुरी कर दिया गया, जिससे उनकी सीटें तकनीकी रूप से खाली हो गईं।

2 दूसरा कदम (आदेश क्रमांक 1339): ठीक इसी दिन दूसरा आदेश जारी कर गुना के राघोगढ़ से पूनम केवट (NHM261617) को सालकानी में और अशोकनगर के ईसागढ़ से सुमन यादव (NHM265460) को माहोली में खाली हुई जगहों पर फिट कर दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों के मुताबिक, HRMIS और PBI सरकारी पोर्टल पर किसी भी कर्मचारी का नाम तभी लॉक या ट्रांसफर किया जा सकता है जब वहां की सीट खाली (वैकेन्ट) हो। अगर यह साधारण प्रशासनिक अदला-बदली (म्यूचुअल ट्रांसफर) थी, तो चारों के नाम एक ही कॉमन लिस्ट में होने चाहिए थे। अलग-अलग आदेश निकालना यह इशारा करता है कि पहले जानबूझकर सीटें खाली कराई गईं और फिर पसंदीदा चेहरों को वहां जगह दी गई।

 दिन का अल्टीमेटम और कार्रवाई की तलवार

अपर मिशन संचालक दिशा प्रणय नागवंशी की ओर से जारी इन आदेशों में कड़ी शर्तें भी जोड़ी गई हैं। कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे 7 कार्य दिवस के भीतर अपने नए आवंटित जिले के CMHO के सामने जॉइनिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यदि तय समय में जॉइनिंग नहीं की जाती है, तो संविदा सेवा शर्तों के उल्लंघन के आरोप में कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य महकमे में ट्रांसफर के नाम पर चल रहे आंतरिक गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।

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