भोपाल । मध्य प्रदेश:

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले लाखों शिक्षकों के लिए इस समय ‘तबादाला’ एक पहेली बन चुका है। मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक प्रदेश में 1 जून से ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन 5 जून बीत जाने के बाद भी न तो ट्रांसफर की कोई नीति (Transfer Policy) सामने आई है और न ही एजुकेशन पोर्टल पर आवेदनों का कोई अता-पता है।

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ आम शिक्षक पोर्टल खुलने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गुपचुप तरीके से कुछ शिक्षकों के ट्रांसफर ऑर्डर भी जारी हो रहे हैं। इस विरोधाभास ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बिना किसी स्पष्ट नीति और गाइडलाइन के ये ट्रांसफर किस आधार पर हो रहे हैं?

आइए जानते हैं इस पूरी अव्यवस्था के पीछे की ‘इनसाइड स्टोरी’।

1. ‘समन्वय’ का खेल: आम शिक्षक कतार में, रसूखदारों की ‘बैकडोर एंट्री’

सूत्रों के मुताबिक, जब तक आम शिक्षकों के लिए ऑनलाइन पोर्टल नहीं खुलता, तब तक सिफारिशी और रसूखदार मामलों को सीधे ‘समन्वय’ (Coordination) में भेजकर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के स्तर से विशेष मंजूरी दिला दी जाती है। यही कारण है कि बिना किसी सार्वजनिक नीति के भी कुछ चहेते लोगों के ट्रांसफर ऑर्डर धड़ाधड़ जारी हो रहे हैं, जबकि दूरदराज के क्षेत्रों में बीमार या गंभीर परिस्थितियों में काम कर रहे आम शिक्षक सिर्फ इंतजार करने को मजबूर हैं।

2. क्यों अटकी है नई ट्रांसफर पॉलिसी?

प्रशासनिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के अनुसार, नई तबादला नीति के अटकने के पीछे 3 बड़े कारण हैं:

 अधिकारियों और राजनेताओं में खींचतान: ब्यूरोक्रेसी (अधिकारी) चाहती है कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और ‘चेहरा विहीन’ (Faceless) हो, जिसमें कंप्यूटर तय करे कि किसका ट्रांसफर कहाँ होगा। इसके विपरीत, राजनीतिक स्तर पर यह दबाव है कि इसमें जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की इच्छा (Desire) को प्राथमिकता मिले। इस ‘पावर गेम’ में फाइल फंसी हुई है।

 अतिशेष (Surplus) शिक्षकों का पेंच: प्रदेश के शहरी और सुगम इलाकों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक जमे हुए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल खाली हैं। नई नीति में इन अतिशेष शिक्षकों को अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में भेजने का कड़ा नियम शामिल है, जिसका अंदरूनी स्तर पर भारी विरोध हो रहा है।

 पोर्टल पर डेटा की अधूरी जानकारी: शिक्षा विभाग का एजुकेशन पोर्टल अब तक अपडेट नहीं हो सका है। कई जिलों से खाली पदों (Vacant Posts) और विषयवार स्वीकृत पदों की सही जानकारी पोर्टल पर फीड ही नहीं की गई है। जब तक विभाग को खाली पदों का सही आंकड़ा नहीं मिलेगा, ऑनलाइन आवेदन लेना संभव नहीं है।

शिक्षकों में भारी आक्रोश, पारदर्शिता पर सवाल

जून का पहला हफ्ता बीतने को है, लेकिन नीति न आने से शिक्षकों में भारी असमंजस है। शिक्षकों का कहना है कि यदि ट्रांसफर करने ही हैं, तो नीति बनाकर सभी को समान अवसर दिया जाना चाहिए। इस तरह गुपचुप तरीके से आदेश जारी करना उन शिक्षकों के साथ अन्याय है जो सालों से अपने गृह जिले या सुगम स्थानों पर आने की आस लगाए बैठे हैं।

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी सोया हुआ स्कूल शिक्षा विभाग कब जागता है और कब आम शिक्षकों के लिए पारदर्शी ऑनलाइन ट्रांसफर विंडो खोली जाती है।

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