भोपाल। मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 के लिए अपनी नई स्थानांतरण नीति (Transfer Policy 2026) की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार शिक्षकों और विभागीय कर्मचारियों के ट्रांसफर के नियमों और समय-सारणी (Time Table) में बड़े बदलाव किए गए हैं। पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले स्कूलों में शिक्षकों की सही व्यवस्था सुनिश्चित करना है, ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो। नोट कर लें ज़रूरी तारीखें (सत्र 2026-27 के लिए टाइम टेबल) इस साल प्रशासनिक और स्वैच्छिक (Voluntary) ट्रांसफर की प्रक्रिया जून और जुलाई के महीने में पूरी की जाएगी: 8 से 15 जून: जिला कैडर के लिए प्रशासनिक ट्रांसफर के प्रस्ताव। 8 से 17 जून: संभाग और राज्य कैडर के लिए प्रशासनिक प्रस्ताव। 18 जून: ट्रांसफर के लिए पोर्टल पर खाली पदों (Vacancies) की लिस्ट देखना। 19 से 23 जून: स्वैच्छिक (Voluntary) ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन की तारीख। 28 से 30 जून: ट्रांसफर के ऑनलाइन आदेश जारी होना। 30 जून से 6 जुलाई: रिलीव होना और नई जगह जॉइन करना। 1 से 7 जुलाई: ट्रांसफर के खिलाफ ऑनलाइन आपत्ति (अभ्यावेदन) दर्ज कराना। 15 जुलाई तक: आपत्तियों का निपटारा। इस ट्रांसफर पॉलिसी की 10 बड़ी और मुख्य बातें: 1 सब कुछ होगा ऑनलाइन: सभी ट्रांसफर आदेश ‘एजुकेशन पोर्टल’ के माध्यम से ऑनलाइन जारी होंगे और कर्मचारियों को मोबाइल ऐप पर मिलेंगे। ऑफलाइन आवेदन किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। 2 ई-अटेंडेंस (E-Attendance) है अनिवार्य: स्वैच्छिक (अपनी मर्जी से) ट्रांसफर के लिए वही शिक्षक पात्र होंगे, जिन्होंने जनवरी से मार्च 2026 तक नियमित रूप से ई-अटेंडेंस लगाई हो। 90% उपस्थिति को ही नियमित माना जाएगा। 3 अतिशेष (Surplus) शिक्षकों के लिए नियम: स्कूलों में तय सेटअप से ज्यादा पदस्थ शिक्षकों को अतिशेष माना जाएगा। जो शिक्षक स्कूल में सबसे लंबे समय से तैनात हैं, उन्हें पहले अतिशेष की श्रेणी में रखा जाएगा। इन्हें शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में भेजा जाएगा। 4 ट्रांसफर में इन्हें मिलेगी पहली प्राथमिकता (Preference): * जिनके पति/पत्नी की मृत्यु हुई हो (घटना के 2 वर्ष के भीतर)। कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 100% रिजल्ट देने वाले स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षक (न्यूनतम 40 छात्र परीक्षा में बैठे हों)। अतिशेष शिक्षक, गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारी या उनके परिवार के सदस्य, निःशक्त (दिव्यांग), विधवा/परित्यक्ता और राष्ट्रीय/राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक। 5 सुरक्षा कवच (इन्हें अतिशेष मानकर नहीं हटाया जाएगा): जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट में 1 वर्ष से कम का समय बचा है, जो 40% या उससे अधिक दिव्यांग हैं, या गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें अतिशेष मानकर ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। 6 सीमित ट्रांसफर सीमा: किसी भी कैडर या पद पर एक साल में तय प्रतिशत से अधिक ट्रांसफर नहीं किए जा सकेंगे (जैसे 200 की संख्या तक अधिकतम 20% ट्रांसफर)। 7 एक बार ट्रांसफर के बाद 3 साल का ब्रेक: यदि किसी शिक्षक का स्वैच्छिक ट्रांसफर एक बार हो जाता है, तो आगामी 3 शैक्षणिक सत्रों तक उनके नए स्वैच्छिक ट्रांसफर आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। 8 ग्रामीण क्षेत्रों में ही होगा ट्रांसफर: जिला या संभाग से बाहर अपनी मर्जी से (स्वैच्छिक) ट्रांसफर केवल ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में ही हो सकेगा। ऐसे ट्रांसफर में वरिष्ठता (Seniority) नए जिले/संभाग में सबसे नीचे मानी जाएगी। 9 गलत जानकारी देने पर गिरेगी गाज: गंभीर बीमारी, दिव्यांगता या विवाह के आधार पर ट्रांसफर लेने के लिए यदि पोर्टल पर गलत या झूठी जानकारी दी गई, तो ट्रांसफर रद्द होने के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी। 10 लोकल फेरबदल ट्रांसफर नहीं: एक ही मुख्यालय के भीतर एक स्कूल से दूसरे स्कूल या कार्यालय में किया गया बदलाव ट्रांसफर की श्रेणी में नहीं आएगा, इसे स्थानीय व्यवस्था माना जाएगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation मप्र शिक्षक तबादला: CM के निर्देश के बाद भी शिक्षा विभाग बेलगाम! 1 जून से होने थे ट्रांसफर, जून का हफ्ता बीतने के बाद भी पॉलिसी गायब सिलवानी मूंग चोरी कांड: क्या ‘सरकारी चाबी’ के पीछे छुपा है 75 लाख के घोटाले का असली मास्टरमाइंड?