भोपाल: मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा से एक बार फिर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाया भी है और अपनी सोची-समझी रणनीति का परिचय भी दिया है। बीजेपी ने पंजाब से आने वाले राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और मध्य प्रदेश के अपने कद्दावर प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल को उच्च सदन (राज्यसभा) भेजने का फैसला किया है। अक्सर चुनावों में चौंकाने वाले चेहरे सामने लाने वाली बीजेपी ने इस बार इन दोनों नेताओं को मैदान में क्यों उतारा है, इसके पीछे तीन सबसे बड़ी रणनीतियां और कारण माने जा रहे हैं: 1. तरुण चुघ: पंजाब को साधने की कोशिश और ‘संगठन मैन’ को इनाम तरुण चुघ मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं और वर्तमान में दिल्ली की राजनीति में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में बड़ा कद रखते हैं। उन्हें मध्य प्रदेश के कोटे से राज्यसभा भेजने के पीछे भाजपा की एक गहरी राष्ट्रीय रणनीति है: पंजाब और सिख समाज में पैठ: बीजेपी लंबे समय से पंजाब में अपने दम पर पैर जमाने की कोशिश कर रही है। तरुण चुघ जैसे मजबूत सिख/पंजाबी चेहरे को संसद के उच्च सदन में भेजकर बीजेपी पंजाब के मतदाताओं को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहती है। राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का बड़ा चेहरा: तरुण चुघ संघ (RSS) के दिनों से ही जमीनी राजनीति से जुड़े हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और तेलंगाना जैसे राज्यों में भाजपा के लिए संकटमोचक और प्रभारी के रूप में बेहतरीन काम किया है। मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए एक ‘सेफ सीट’ (सुरक्षित सीट) है, इसलिए पार्टी ने अपने इस राष्ट्रीय स्तर के रणनीतिकार को बिना किसी चुनावी जोखिम के संसद पहुंचाने के लिए एमपी कोटे का इस्तेमाल किया है। 2. रजनीश अग्रवाल: ‘लो-प्रोफाइल’ निष्ठावान कार्यकर्ता को सबसे बड़ा तोहफा मध्य प्रदेश के ही रहने वाले रजनीश अग्रवाल को टिकट देना यह दिखाता है कि बीजेपी आज भी अपने समर्पित और पर्दे के पीछे काम करने वाले नेताओं को सही समय पर पहचान देती है। पार्टी की वफादारी का पुरस्कार: रजनीश अग्रवाल सालों से मध्य प्रदेश बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता और प्रदेश मंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं। जब बड़े-बड़े नेता दल-बदल कर रहे होते हैं या टिकट के लिए दबाव बनाते हैं, तब रजनीश अग्रवाल बिना किसी गुटबाजी के पूरी निष्ठा से संगठन का काम करते रहे। बीजेपी ने उन्हें टिकट देकर कैडर (कार्यकर्ताओं) को यह संदेश दिया है कि “काम करते रहो, पार्टी हर छोटे कार्यकर्ता को देख रही है।” बौद्धिक और तार्किक चेहरा: रजनीश अग्रवाल की छवि एक बेहद पढ़े-लिखे, शांत और तार्किक नेता की है। टीवी डिबेट्स से लेकर मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखना हो, वे हमेशा विवादों से दूर रहकर मजबूती से अपनी बात रखते हैं। भाजपा को राज्यसभा में ऐसे ही तार्किक और मजबूत वक्ताओं की जरूरत है। 3. ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और ‘गुटबाजी’ पर फुल स्टॉप मध्य प्रदेश बीजेपी में हमेशा से क्षेत्रीय और जातीय संतुलन (सोशल इंजीनियरिंग) बिठाना एक बड़ी चुनौती रहा है। रजनीश अग्रवाल (सामान्य वर्ग/वैश्य) को मौका देकर पार्टी ने महाकौशल/बुंदेलखंड के समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार एमपी के किसी बड़े स्थानीय ‘दिग्गज’ या पूर्व मंत्री को टिकट न देकर, पार्टी ने राज्य में किसी भी तरह की गुटबाजी की संभावना को पूरी तरह खत्म कर दिया है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation कभी जिन अपराधियों को भेजा था जेल, आज उन्हीं से पूर्व जज को लग रहा डर; कोर्ट से की अलग सेल की मांग मप्र शिक्षक तबादला: CM के निर्देश के बाद भी शिक्षा विभाग बेलगाम! 1 जून से होने थे ट्रांसफर, जून का हफ्ता बीतने के बाद भी पॉलिसी गायब