टेक दुनिया (Tech World) में इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की होड़ मची हुई है। एक तरफ जहां बड़ी कंपनियां AI में पानी की तरह पैसा बहा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ आम कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल लगभग 98 टेक कंपनियां 92,000 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी (Layoffs) कर सकती हैं।

नौकरियां क्यों जा रही हैं?

टेक इंडस्ट्री की नौकरियों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘लेऑफ्स’ (Layoffs.fyi) के अनुसार, कंपनियों का पूरा फोकस अब AI तकनीक को बेहतर बनाने पर है। बाजार में बने रहने के लिए कंपनियों पर AI में निवेश करने का भारी दबाव है। इसी वजह से वे अपने अन्य खर्च कम करने के लिए कर्मचारियों की छुट्टी कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और मेटा (Meta) जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी अपने पुराने प्रोजेक्ट्स रोककर अपना सारा फोकस AI टूल्स पर शिफ्ट कर दिया है।

AI में कंपनियों का महा-निवेश (Mega Investment):

बड़ी टेक कंपनियां AI की इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहतीं। जानिए कौन कितना पैसा लगा रहा है:

• Google (गूगल): गूगल ने AI तकनीक को और एडवांस्ड बनाने के लिए 3.76 लाख करोड़ रुपये के भारी निवेश की तैयारी की है।

• Tesla (टेस्ला): एलन मस्क की कंपनी टेस्ला भी इस साल AI पर लगभग 2.35 लाख करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। इसके अलावा मस्क की दूसरी कंपनी ‘स्पेसएक्स’ (SpaceX) ने AI स्टार्टअप ‘कर्सर’ के साथ एक अहम करार किया है।

• Amazon (अमेजन): अमेजन ने AI कंपनी ‘एंथ्रोपिक’ (Anthropic) पर दांव खेला है और इसमें 2.35 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर रही है।

किस कंपनी में कितनी छंटनी?

AI में बढ़ते खर्च की भरपाई कर्मचारियों की छंटनी से की जा रही है:

• Microsoft: कंपनी ने अमेरिका में अपने 7% कर्मचारियों को निकाल दिया है। इसके साथ ही सीनियर अधिकारियों को जल्दी रिटायरमेंट (VRS) का ऑफर भी दिया गया है।

• Meta: फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने अपने 10% (लगभग 8,000) कर्मचारियों को कम करने की घोषणा कर दी है।

OpenAI भी बदल रहा है अपनी रणनीति

चैटजीपीटी (ChatGPT) बनाने वाली मशहूर कंपनी ओपनएआई (OpenAI) ने भी अपने खर्च कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपने खुद के महंगे डेटा सेंटर बनाने का प्लान फिलहाल टाल दिया है। अब वे दूसरी क्लाउड कंपनियों के सर्वर किराए पर लेकर काम चलाएंगे। हालांकि, इसके बावजूद भी उन्हें इस पर 56 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। एंथ्रोपिक जैसे नए प्रतिद्वंदियों के आ जाने से मार्केट में कॉम्पिटिशन काफी बढ़ गया है।

इन सभी आंकड़ों से साफ है कि एआई (AI) अब केवल एक नई तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह टेक कंपनियों के सर्वाइवल की लड़ाई बन गई है। लेकिन दुर्भाग्य से, इस तकनीकी क्रांति की सबसे बड़ी कीमत टेक इंडस्ट्री के कर्मचारियों को अपनी नौकरी गंवाकर चुकानी पड़ रही है।

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